Sunday, March 1, 2026
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ऑस्ट्रेलियन लड़की से विवाह करना टिकारी महाराजा कैप्टन गोपाल शरण की भूल थी ?

सुरा और सुंदरियों की भेंट चढ़ गया मगध का टिकारी राज किला  (पार्ट-4)

महाराजा कैप्टन गोपाल शरण काफी खूबसूरत, मृदुल स्वभाव और रंगीन मिजाज के व्यक्ति थे । इनका महल अति सुशोभित रहता था। 52 आंगन के किले में 5 तलों में बने महल के बीच उनका निवास था । उनके महल में देशी – विदेशी महिलाएंँ रहती थीं । उन्होंने एक ईसाई ऑस्ट्रेलियन खूबसूरत एलसी थॉमसन नामक लड़की के साथ हिन्दू रीति से 1909 ई. में लखनऊ में शादी की । कैप्टन गोपाल शरण ने अपने दौलत का बड़ा हिस्सा उसी को उपहार स्वरूप प्रदान किया । वह महिला नख- शिख सिंगार करती थी । उसके बनारसी साड़ियों पर स्वर्णजड़ित धागों से काम किया हुआ होता था । वह हीरे- मोती से जड़ी अति कीमती साड़ी और गहने पहनती थी । 

महारानी राधेश्वरी कुंअर मां का निधन 27 मई 1886 ईस्वी को हो गया । तत्पश्चात उनके पुत्र गोपाल शरण के नाबालिग होने के कारण 1886 ईस्वी से 1904 ई० तक यानि 18 वर्षों तक टिकारी  राज कोर्ट के नियमानुसार ” कोट्स ऑफ़ वार्ड ” के अधीन रहा । पिता अंबिका प्रसाद सिंह ही इस राज को अपनी मृत्युपर्यंत बालक महाराजा गोपाल शरण के संरक्षक बने रहे । ( गया गजेटियर : पेज -338, 339, 340 लेखक-पीसी राय ) ।

1904 ई० के बाद गोपाल शरण पूर्ण रूप से राज-काज संभालने लगे । इस बीच सन् 1911- 12 ईस्वी में गोपाल शरण की मित्रता बेगम सईदा खातून से हो गई, जो औरंगाबाद राज की मालकिन बनी । इनसे महाराज को चार पुत्र पैदा हुए जो औरंगाबाद राज में ही बने रहे ।

प्रथम विश्वयुद्ध में अंग्रेजों को राजा ने सहायता प्रदान की थी। वे अंग्रेजों की सेना मे भर्ती होकर लडे़ थे और अधिकारी को भारी मुसिबत से बचाया था। इस खुशी में अंग्रेजों ने इन्हें कैप्टन की उपाधि दी थी । इंग्लैंड से लौटने के बाद ये कैप्टन महाराजा गोपाल शरण कहलाए और टिकारी राज की भली-भांति गद्दी संभाली । सन्1919 ईस्वी में कुंवर विद्या देवी से इनकी शादी हुई । इनसे उन्हें 1921 ईस्वी में एक पुत्री पैदा ली जिसका नाम उमेश्वरी कुंवर रखा गया । उमेश्वरी कुंअर की शादी अमावां स्टेट के बड़े राजकुमार रघुवंश प्रसाद नारायण सिंह से 1933 ईस्वी में हुई । यह परिवार अभी भी जीवित है ।

कैप्टन गोपाल शरण मृदुल स्वभाव और रंगीन मिजाज के व्यक्ति थे । इनका महल अति सुशोभित रहता था। बावन आंगन के किले में 5 तलों में बने महल के बीच उनका निवास था । रँगमहल, खजाने, आयुधशाला,  दीवाने खास, खूबसूरत विशाल 9 हाथ का गेट लगा था । अति कारीगिरी से भरा नक्काशी युक्त सीढियां । दाहिनी ओर गर्जना करता हुआ नौ हाथ का बंगाल टाइगर बाघ सुशोभित था । कैप्टन गोपाल शरण काफी खूबसूरत थे । उनके महल में देशी – विदेशी महिलाएंँ रहती थीं । उन्होंने एक ईसाई ऑस्ट्रेलियन खूबसूरत एलसी थॉमसन नामक लड़की के साथ हिन्दू रीति से 1909 ई. में लखनऊ में शादी की । वह राज में सीता देवी नाम से जानी गई।

महाराजा कैप्टन गोपाल शरण ने अपने दौलत का सबसे बड़ा हिस्सा उसी को उपहार स्वरूप प्रदान किया । वह महिला नख- शिख सिंगार करती थी । उसके बनारसी साड़ियों  पर स्वर्णजड़ित धागों से काम किया हुआ होता था । वह हीरे- मोती से जड़ी अति कीमती साड़ी और गहने पहनती थी । एक समय की घटना है कि वर्ष 1917 ईस्वी में जब वह ऑस्ट्रेलिया के सिडनी टाउन हॉल में एक देशभक्ति समारोह में शामिल हुई तो लोग इसे देखते ही रह गए । एक अखबार , द मेलबोर्न ट्रूथ ने  खबर प्रकाशित किया कि – इसे देखते ही लोगों को स्वाँस रोकने पर मजबूर हो जाना पड़ता था । कहने का तात्पर्य यह कि वह इतनी खुबसूरत थी । पूर्व के बने सभी भवन महारानी एलसी के लिये बेकार थे ।

राज का भव्य आकर्षक राजमहल, टिकारी राज का किला , पटना तथा गया की महलें भी उसे अच्छे नहीं लगते । तब महाराजा ने इस रानी के लिए भलुआ जंगल के बीच एक अति भव्य आकर्षक महल का निर्माण करवाया । वह आज भी अति भव्य, आकर्षक और दर्शनीय है, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। जब रानी सीता देवी उर्फ एलसी टिकारी राज आती तो वह वहीं ठहरती थी । रानी एलसी का निधन 21-11-1967 को एक अस्पताल मे हुआ , जबकि महाराज कैप्टन गोपाल शरण का निधन पचहत्तर वर्ष की अवस्था मे 17-2-1958 को गया के ही अपने महल अंटा कोठी में हुआ ।
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