विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले में दांगी समाज की ओर से नि:शुल्क दांगी चिकित्सा शिविर का शुभारंभ
"गयायां न ही तत् स्थानं यत्र तीर्थेन विद्यते। सानिध्यं सर्व तीर्थानां गया तीर्थ ततो वरम्।।"- वायु पुराण
"गयायां न ही तत् स्थानं यत्र तीर्थेन विद्यते। सानिध्यं सर्व तीर्थानां गया तीर्थ ततो वरम्।।"- वायु पुराण

यह पितृपक्ष महासंगम 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलेगा, जिसमें 10 से 12 लाख पिंडदानी व तीर्थ यात्री आकर अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाने हेतु पिंडदान करेंगे। सीएम ने अपने उद्घाटन भाषण में यह गया जी में अधिकारियों को कहा कि पितृपक्ष मेला में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर से बेहतर सुविधाएं प्रदान करें, ताकि "अतिथि देवो भव" की भावना को लेकर वे अपने घर को यहां से वापस संदेश लेकर जाएं।

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यदि इन पुरावशेषों का संदर्भ और काल-निर्धारण व्यवस्थित पुरातात्विक उत्खनन तथा वैज्ञानिक अध्ययन से प्रमाणित किया जाए, तो यह स्थल टिकारी क्षेत्र के इतिहास को मौर्य एवं उत्तर-मौर्य काल की व्यापक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
"गयायां न ही तत् स्थानं यत्र तीर्थेन विद्यते। सानिध्यं सर्व तीर्थानां गया तीर्थ ततो वरम्।।"- वायु पुराण

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