गोल्ड स्टार मेरठ की दिवाली पार्टी में डांडिया और तंबोला की रही धूम
कार्यक्रम की चेयरपर्सन शिप्रा बंसल ने आकर्षक गेम्स का आयोजन कराया। इस दौरान डांडिया रास, तंबोला और विभिन्न मनोरंजक प्रतियोगिताएं हुईं।
कार्यक्रम की चेयरपर्सन शिप्रा बंसल ने आकर्षक गेम्स का आयोजन कराया। इस दौरान डांडिया रास, तंबोला और विभिन्न मनोरंजक प्रतियोगिताएं हुईं।

रैली को लेकर सुबह से ही आसपास के इलाकों में यातायात प्रभावित होने की खबर है। दूसरे राज्यों से समर्थकों के पहुंचने के बीच आम लोगों को भी कई जगह ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ रहा है।

तमिलनाडु सरकार के इस फैसले से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

चुनाव आयोग के मुताबिक, दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 22 दिसंबर को जारी होगी। वहीं, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना और नागालैंड की फाइनल वोटर लिस्ट 30 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी।
बिहार की अनेक ऐतिहासिक इमारतें, पुरातात्त्विक स्थल, प्राचीन मंदिर, किले और लोक-सांस्कृतिक परंपराएँ समुचित संरक्षण की अपेक्षा रखती हैं। कई स्थानों पर जन-जागरूकता का अभाव, अतिक्रमण, रखरखाव की कमी तथा ऐतिहासिक महत्व के प्रति उदासीनता गंभीर चुनौतियाँ प्रस्तुत करती हैं।
संस्थान की ओर से बताया गया कि हस्तनिर्मित दीपावली उत्पादों की बिक्री से प्राप्त धनराशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा और दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए किया जाएगा।

क्या यह आंदोलन बेरोजगारी, शिक्षा और लोकतांत्रिक जवाबदेही जैसे वास्तविक मुद्दों को उठाने वाला युवा प्रतिरोध है, या इसकी राजनीति धीरे-धीरे टकराव, प्रतीकात्मक उग्रता और संस्थाओं पर दबाव बनाने की रणनीति की ओर बढ़ रही है?
बिहार की अनेक ऐतिहासिक इमारतें, पुरातात्त्विक स्थल, प्राचीन मंदिर, किले और लोक-सांस्कृतिक परंपराएँ समुचित संरक्षण की अपेक्षा रखती हैं। कई स्थानों पर जन-जागरूकता का अभाव, अतिक्रमण, रखरखाव की कमी तथा ऐतिहासिक महत्व के प्रति उदासीनता गंभीर चुनौतियाँ प्रस्तुत करती हैं।

चुनाव आयोग के मुताबिक, दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 22 दिसंबर को जारी होगी। वहीं, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना और नागालैंड की फाइनल वोटर लिस्ट 30 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी।
सऊदी अरब में दो बांग्लादेशी नागरिकों को मौत की सजा दिए जाने का मामला केवल एक आपराधिक मुकदमे या किसी देश की न्यायिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है। यह मानवाधिकार, न्यायिक पारदर्शिता, मृत्युदंड की वैधता और वैचारिक निष्पक्षता से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या फांसी दिये जाने से पहले व्यक्ति के परिवार एवं वहां की सरकार को सूचित करना जरूरी नहीं था ? इस घटना के बाद एक असहज सवाल उठना स्वाभाविक है, क्या मानवाधिकारों की चिंता सार्वभौमिक है, या वह राजनीतिक विचारधारा, धार्मिक पहचान और अंतरराष्ट्रीय शक्ति-संबंधों के हिसाब से बदल जाती है?
कार्यक्रम की चेयरपर्सन शिप्रा बंसल ने आकर्षक गेम्स का आयोजन कराया। इस दौरान डांडिया रास, तंबोला और विभिन्न मनोरंजक प्रतियोगिताएं हुईं।
हमारे न्यूज़लेटर से जुड़ें और कोई बड़ी खबर मिस न करें। बिल्कुल मुफ़्त।