
सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने वालों के खिलाफ गाजियाबाद पुलिस का अभियान
जिले के सभी थाना क्षेत्रों में पुलिस द्वारा रोजाना शराब ठेकों के आसपास, सड़क किनारे और सड़क किनारे खड़े वाहनों में बैठकर शराब पीने वालों की जांच की जा रही है।

जिले के सभी थाना क्षेत्रों में पुलिस द्वारा रोजाना शराब ठेकों के आसपास, सड़क किनारे और सड़क किनारे खड़े वाहनों में बैठकर शराब पीने वालों की जांच की जा रही है।

ऐसी मान्यता है कि गया जी धाम एकमात्र पितृ तीर्थ है,जहां तर्पण के माध्यम से पितरों को जल अर्पित कर उन्हें तृप्त किया जाता है। इसके बदले में पितर उन्हें सुफल और आशीर्वाद देकर उनके संपूर्ण परिवार के सुखमय जीवन की कामना करते हैं। गया जी तीर्थ स्थल में पिंडदान व श्राद्ध कर्म संपन्न करने संबंधी विवरण अनेक धार्मिक ग्रंथों में विस्तार से मिलती है। यथा- वायु पुराण, गरुड़ पुराण, नारद पुराण,रामायण, महाभारत आदि।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को “पानी बचाओ–जीवन बचाओ” का संदेश देते हुए जल के महत्व, पानी की बर्बादी रोकने, जल का उचित उपयोग करने तथा भविष्य के लिए जल संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी गई।

अबतक करीब नौ लाख से अधिक यात्री पितरों को जन्म-मरण के आवागमन से मुक्ति दिलाकर विष्णु लोक यानी स्वर्ग लोक भेजने की कामना से श्राद्धकर्म संपन्न किया।
"गयायां न ही तत् स्थानं यत्र तीर्थेन विद्यते। सानिध्यं सर्व तीर्थानां गया तीर्थ ततो वरम्।।"- वायु पुराण

यह पितृपक्ष महासंगम 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलेगा, जिसमें 10 से 12 लाख पिंडदानी व तीर्थ यात्री आकर अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाने हेतु पिंडदान करेंगे। सीएम ने अपने उद्घाटन भाषण में यह गया जी में अधिकारियों को कहा कि पितृपक्ष मेला में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर से बेहतर सुविधाएं प्रदान करें, ताकि "अतिथि देवो भव" की भावना को लेकर वे अपने घर को यहां से वापस संदेश लेकर जाएं।

जिले के सभी थाना क्षेत्रों में पुलिस द्वारा रोजाना शराब ठेकों के आसपास, सड़क किनारे और सड़क किनारे खड़े वाहनों में बैठकर शराब पीने वालों की जांच की जा रही है।

ऐसी मान्यता है कि गया जी धाम एकमात्र पितृ तीर्थ है,जहां तर्पण के माध्यम से पितरों को जल अर्पित कर उन्हें तृप्त किया जाता है। इसके बदले में पितर उन्हें सुफल और आशीर्वाद देकर उनके संपूर्ण परिवार के सुखमय जीवन की कामना करते हैं। गया जी तीर्थ स्थल में पिंडदान व श्राद्ध कर्म संपन्न करने संबंधी विवरण अनेक धार्मिक ग्रंथों में विस्तार से मिलती है। यथा- वायु पुराण, गरुड़ पुराण, नारद पुराण,रामायण, महाभारत आदि।
"गयायां न ही तत् स्थानं यत्र तीर्थेन विद्यते। सानिध्यं सर्व तीर्थानां गया तीर्थ ततो वरम्।।"- वायु पुराण

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