हुनर हाट में विशेष बच्चों की प्रतिभा ने मोहा मन, आत्मनिर्भरता का दिया संदेश
संस्थान की ओर से बताया गया कि हस्तनिर्मित दीपावली उत्पादों की बिक्री से प्राप्त धनराशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा और दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए किया जाएगा।
संस्थान की ओर से बताया गया कि हस्तनिर्मित दीपावली उत्पादों की बिक्री से प्राप्त धनराशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा और दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए किया जाएगा।
सऊदी अरब में दो बांग्लादेशी नागरिकों को मौत की सजा दिए जाने का मामला केवल एक आपराधिक मुकदमे या किसी देश की न्यायिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है। यह मानवाधिकार, न्यायिक पारदर्शिता, मृत्युदंड की वैधता और वैचारिक निष्पक्षता से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या फांसी दिये जाने से पहले व्यक्ति के परिवार एवं वहां की सरकार को सूचित करना जरूरी नहीं था ? इस घटना के बाद एक असहज सवाल उठना स्वाभाविक है, क्या मानवाधिकारों की चिंता सार्वभौमिक है, या वह राजनीतिक विचारधारा, धार्मिक पहचान और अंतरराष्ट्रीय शक्ति-संबंधों के हिसाब से बदल जाती है?

दिवाली तक प्रोटेस्ट का कोई प्लान नहीं, परिवार के साथ रहें, सीजेपी कार्यकर्ताओं से अभिजीत दिपके की अपील

दिल्ली पुलिस ने जमानत की कार्यवाही के दौरान स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को कथित तौर पर धमकी देने के आरोप में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

खबर के मुताबिक, बारिश से बचने के लिए बाहर खड़े श्रद्धालुओं ने पंडाल के भीतर जाने की कोशिश की। वहीं, पंडाल में भी भीड़ थी और बाहर निकलने के रास्ते में बनी सीढ़ियों पर भगदड़ मची।

मां दुर्गा के दर्शन के लिए आने वाले विदेशी मेहमानों को राज के बने विशेष अतिथिशाला में ठहराया जाता और उन्हें उचित सम्मान दिया जाता था। उस अतिथि शाला के जीर्ण अवशेष अभी भी हैं। प्रजा महाराजा कैप्टन गोपाल शरण को भगवान समझती थी। वह दयालु भी काफी थे और गरीबों की मालगुजारी माफ कर देते थे। जो भी उनके पास सहयोग के लिए आता, उसे वे भरपूर सहयोग देते थे।
सऊदी अरब में दो बांग्लादेशी नागरिकों को मौत की सजा दिए जाने का मामला केवल एक आपराधिक मुकदमे या किसी देश की न्यायिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है। यह मानवाधिकार, न्यायिक पारदर्शिता, मृत्युदंड की वैधता और वैचारिक निष्पक्षता से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या फांसी दिये जाने से पहले व्यक्ति के परिवार एवं वहां की सरकार को सूचित करना जरूरी नहीं था ? इस घटना के बाद एक असहज सवाल उठना स्वाभाविक है, क्या मानवाधिकारों की चिंता सार्वभौमिक है, या वह राजनीतिक विचारधारा, धार्मिक पहचान और अंतरराष्ट्रीय शक्ति-संबंधों के हिसाब से बदल जाती है?

क्या यह आंदोलन बेरोजगारी, शिक्षा और लोकतांत्रिक जवाबदेही जैसे वास्तविक मुद्दों को उठाने वाला युवा प्रतिरोध है, या इसकी राजनीति धीरे-धीरे टकराव, प्रतीकात्मक उग्रता और संस्थाओं पर दबाव बनाने की रणनीति की ओर बढ़ रही है?

मां दुर्गा के दर्शन के लिए आने वाले विदेशी मेहमानों को राज के बने विशेष अतिथिशाला में ठहराया जाता और उन्हें उचित सम्मान दिया जाता था। उस अतिथि शाला के जीर्ण अवशेष अभी भी हैं। प्रजा महाराजा कैप्टन गोपाल शरण को भगवान समझती थी। वह दयालु भी काफी थे और गरीबों की मालगुजारी माफ कर देते थे। जो भी उनके पास सहयोग के लिए आता, उसे वे भरपूर सहयोग देते थे।

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ऑल इंडिया 2600वीं रैंक हासिल कर बढ़ाया शहर और परिवार का मान
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