
पितृपक्ष का तर्पण एक क्रिया तो समर्पण एक भाव
साधारण शब्दों में तर्पण का अर्थ तृप्त करना होता है। जल, कुशा और तिल के माध्यम से हम अपने पूर्वजों को जल अर्पित कर उनके प्रति अपनी स्मृति, श्रद्धा और कर्तव्य को प्रकट करते हैं। इस प्रकार हम अपने प्राचीन परंपरा का निर्वहन कर सनातन संस्कृति का अनुपालन करते हैं। यह एक अनुशासन माना गया है, जो हमें याद दिलाता है कि हमारा अस्तित्व अकेले नहीं है,बल्कि अपने अंश को सर्वस्व समर्पण के भाव को परिलक्षित करता है।









