Monday, March 2, 2026
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विश्वप्रसिद्ध मोक्षधाम “विष्णुपद गयाजी” में पितृपक्ष महासंगम शांतिपूर्ण संपन्न

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इस वर्ष विदेशों से भी काफी संख्या में तीर्थयात्री अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाने की कामना लेकर गयाजी “विष्णुधाम” में पधारे। विदेशों से आये तीर्थ यात्रियों में मुख्य रूप से रुस, कजाकिस्तान, यूक्रेन, नाइजीरिया, पोलैंड, दक्षिण अफ्रीका, लॉडविस्वोट और घाना के अलावा थाइलैंड से वासानोप वाचिरमन आदि ने पिंडदान कर अपने पूर्वजों के लिए श्रद्धा और सम्मान अर्पित किये। विदेशों से आये ये सभी तीर्थ यात्री सनातन धर्मावलंबी थे।

 

पन्द्रह दिनों तक चलने वाला राजकीय पितृमहासंगम यानी पितृपक्ष मेला-2024,दो अक्टूबर को संपन्न हो गया। श्रद्धालुओं ने गौ-माता की पूंछ पकड़ अपने पूर्वजों को वैतरणी पार कराया। विश्वप्रसिद्ध मोक्षधाम “विष्णुपद गयाजी” में तीर्थ यात्री श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर अपने को धन्य माना।

देश-विदेश से आये लाखों तीर्थयात्री व श्रद्धालुओं ने अपने पितरों को जन्म और मरण से मुक्ति दिलाकर पितृऋण और पितृदोष से उन्होंने मुक्ति पायी। इसके लिए वे अपने पूर्वजों के प्रति श्राद्ध,तर्पण और पिंडदान किये तथा उन्हें बैकुंठधाम जाने के कामना की। पिंडदानियों ने पवित्र फल्गु नदी में स्नान कर तर्पण करने के बाद मुंडपृष्ठा, आदि गदाधर, भीम गया,गो-प्रचार, गदालोल, गयासिर, सीता कुंड, धर्मारण्य, प्रेत शिला, रामशिला,सोलह वेदी, अक्षयवट आदि वेदियों की पूजा-अर्चना और पिंडदान कर पितरों को आवागमन से मुक्ति दिलायी।

इस वर्ष विदेशों से भी काफी संख्या में तीर्थयात्री अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाने की कामना लेकर गयाजी “विष्णुधाम” में पधारे। विदेशों से आये तीर्थ यात्रियों में मुख्य रूप से रुस, कजाकिस्तान, यूक्रेन, नाइजीरिया, पोलैंड, दक्षिण अफ्रीका, लॉडविस्वोट और घाना के अलावा थाइलैंड से वासानोप वाचिरमन आदि ने पिंडदान कर अपने पूर्वजों के लिए श्रद्धा और सम्मान अर्पित किये। विदेशों से आये ये सभी तीर्थ यात्री सनातन धर्मावलंबी थे।

सरकारी स्तर पर पितृपक्ष मेला-2024 का समापन राज्य के पर्यटन व उद्योग सह जिला प्रभारी मंत्री नीतीश मिश्रा ने विष्णु पद परिसर स्थित बने भव्य पंडाल के बीच किया। उन्होंने बताया कि इस बार “क्यूआर कोड” से पिंडदानियों से काफी सुझाव मिले हैं। इन सुझावों के आधार पर अगले वर्ष मेले को और भी बेहतर करने की कोशिश की जायेगी। मंत्री ने जिलाधिकारी एवं उनकी टीम को “पितृपक्ष-मेले” में दिये गए सहयोग की सराहना की। वहीं सहकारिता मंत्री डा.प्रेम कुमार ने कहा कि नीतीश कुमार की सरकार जब से बिहार में बनी है, तबसे निरंतर राज्य का विकास हो रहा है। मेले को लेकर मुख्यमंत्री स्वयं समीक्षा करने कई बार गया आए थे।

परंतु, नगर निगम की निष्क्रियता इस मेले में जग उजागर हुई। मुख्य सड़क को छोड़कर सभी सड़कें व गलियां,जिस मार्ग से तीर्थयात्री जाते थे- पानी भरे रहने,गंदगी व कीचड़ के कारण परेशानियों का सामना उन्हें करना पड़ा। इतना ही नहीं, रोड पर आवारा गायों और भैंसों का जमावडा़ तथा उन्हें विचरण करते रहने के कारण यात्रियों को काफी परेशानियों को झेलते रहना पड़ा। सफाई के नाम पर एजेंसी द्वारा खानापूर्ति कराकर सरकार अपना पल्ला झाड़ ली। मेले के नाम पर करोड़ों रुपये का सिर्फ वारा-न्यारा हुआ।

ऊधर फल्गु नदी में रबर डैम से उत्तर पिता-महेश्वर घाट में पांच किशोर व किशोरी डूबे। उनमें से तीन को तो गोताखोरों ने बचा लिया,किन्तु दो को डूबने से मौत हो गई। उनमें से एक 17 वर्षीया रिया कुमारी नाम की नवम् की छात्रा थी तथा दूसरा आलोक कुमार दशम् का छात्र था। दोनों बेलागंज स्थित रामेश्वर उच्च विद्यालय के छात्र थे। वे सभी स्काउट एंड गाइड के माध्यम से पितृपक्ष मेले में श्रद्धालुओं को सेवा देने के लिये बुलाये गये थे। ये दोनों ही छात्र रुस्तमपुर गांव के वासी थे, जो जहानाबाद जिले के हुलासगंज प्रखंड में पड़ता है।

पितृपक्ष मेले में कई अन्य संस्थाओं,विद्यालय के प्रभारियों,एनसीसी के कैडटों आदि ने भी बढ.-चढ.कर अपना योगदान दिया है,उनमें बिराज मोहिनी कन्या मध्य विद्यालय भी शामिल है। विद्यालय प्रभारी डा.अरुण कुमार सिन्हा ने बताया कि उनके विद्यालय में यू.पी.और पश्चिमबंगाल के कुल 388 यात्रियों के आवासन की व्यवस्था जिला प्रशासन द्वारा कराई गई थी,जिन्हें भरपूर सहयोग यहां से दी गई। यात्री सभी यहां की व्यवस्था से काफी खुश होकर प्रभारी प्रधनाध्यापक सह आवासन प्रभारी को धन्यवाद दिया और इनके कार्यों की सराहना की।

यात्रियों की सुरक्षा के लिये आलोक रजक,प्रवीण पांडेय एवं सुनील उपाध्याय दण्डाधिकारी यहां प्रतिनियुक्त किए गये थे,जिनका कार्य सराहनीय रहा। चिकित्सा सुबिधा प्रदान करने के लिये डा.रमेश कुमार, एम.डी.,चिकित्सा पदा.जहानाबाद एवं एएनएम नम्रता कुमारी यहां तैनात की गई थीं, जो रोगियों की भरपूर सेवा दी। इसके अलावा विद्यालय की सहायक शिक्षिका निलम कुमारी एवं सरिता कुमारी का योगदान काफी सराहनीय रहा।

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