Wednesday, March 11, 2026
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बोधगया में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध-महोत्सव का आयोजन

 

इस अवसर पर “तथागत” नामक एक स्मारिका का भी मान्य अतिथियों द्वारा लोकार्पण किया गया। महोत्सव का मुख्य उद्देश्य देश-विदेश की सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा भाग लेने वाले देशों की समृद्ध परंपराओं को प्रदर्शित करना है। साथ ही भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के कला प्रदर्शन करने का यह मंच है। यह एक वार्षिक कार्यक्रम है,जो पर्यटन विभाग बिहार सरकार एवं जिला प्रशासन गया तथा बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति के सहयोग से आयोजित होता है।

अंतर्राष्ट्रीय स्थल बोधगया में तीन दिवसीय “बौद्ध महोत्सव-2025” का शुभारंभ 31 जनवरी 2025 से 2 फरवरी 2025 तक के लिए किया गया। महोत्सव की शुरुआत मंच पर आगत अतिथियों द्वारा ‘दीप-प्रज्वलित’ कर किया गया। इस अवसर पर माननीय मंत्री पर्यटन एवं उद्योग विभाग बिहार सह प्रभारी मंत्री गया जिला नीतीश मिश्रा की अध्यक्षता एवं मुख्य अतिथि माननीय मंत्री सहकारिता तथा पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग बिहार सरकार डॉक्टर प्रेम कुमार की उपस्थिति में आरंभ हुआ।

इस अवसर पर “तथागत” नामक एक स्मारिका का भी मान्य अतिथियों द्वारा लोकार्पण किया गया। महोत्सव का मुख्य उद्देश्य देश-विदेश की सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा भाग लेने वाले देशों की समृद्ध परंपराओं को प्रदर्शित करना है। साथ ही भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के कला प्रदर्शन करने का यह मंच है। यह एक वार्षिक कार्यक्रम है,जो पर्यटन विभाग बिहार सरकार एवं जिला प्रशासन गया तथा बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति के सहयोग से आयोजित होता है। यह एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है,जिसमें बुद्ध के दिखाये मार्ग ही बिहार की संस्कृति है,इसे दर्शाया जाता है। इस महोत्सव की शुरुआत 31 जनवरी को प्राप्तः डुंगेश्वरी (प्राक्-बोधि)जहाँ गौतम बुद्ध ने छह वर्षों तक कठोर तपस्या की थी,से प्रारंभ होकर महाबोधि मंदिर तक के 8 किलोमीटर पैदल “ज्ञान पदयात्रा”की शोभा से की जाती है। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु,बौद्ध भिक्षु और अधिकारीगण शामिल होते हैं।

प्रथम दिन शुक्रवार को संध्या 6 बजे कालचक्र के मैदान में तीन दिवसीय बौद्ध महोत्सव की अध्यक्षता पर्यटन एवं उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा ने किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा की उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में बिहार का महत्वपूर्ण स्थान है। बिहार में पर्यटन की असीम संभावनाएं विद्यमान है। हम इस संबंध में कोशिश कर रहे हैं कि बिहार के सभी पर्यटन स्थल विकसित हों और देश-विदेश से अधिक से अधिक संख्या में पर्यटक लोग बिहार आएं। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में 6:30 प्रतिशत का योगदान सिर्फ पर्यटन का है। हमारा प्रयास है कि अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी बिहार की कला और संस्कृति से जुड़ी प्रतिभाओं को स्थान मिले। हमारे उत्पाद विदेश तक जाएं। उन्होंने कहा कि बौद्ध महोत्सव के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बिहार के संस्कृति की प्रस्तुति की जाती है। यह महोत्सव केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि इससे हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक यात्रा मजबूत होती है।

श्री मिश्रा ने कहा कि विभिन्न भाषाओं में बोधगया से संबंधित वीडियो बनाने का कार्य शुरू किया गया है, जिन्हें विभिन्न देशों में प्रमोट किया जाएगा। पिछले दिनों बिहार पर्यटन विभाग वियतनाम व जापान में भी अपना प्रमोशन दे चुका है। बोधगया के साथ ही राजगीर, नालंदा और मां सीता की जन्मस्थली सीतामढ़ी को भी विकसित करने का प्रयास जारी है। हम ऐसी नीति ला रहे हैं, जिसके माध्यम से लोग अपने घरों में भी पर्यटकों को ठहरा सकेंगे। श्री मिश्रा ने डोभी में औद्योगिक कॉरिडोर की चर्चा करते हुए कहा कि जल्द ही हम पर्यटन और उद्योग के क्षेत्र में भी काफी आगे निकल चुके होंगे। बुद्ध के बताएं मार्ग पर चलना बिहार की संस्कृति में शामिल है। हम अपनी संस्कृति को बौद्ध महोत्सव के माध्यम से प्रदर्शित कर रहे हैं।

सहकारिता एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉक्टर प्रेम कुमार ने कहा कि आज हम 38 वें बौद्ध महोत्सव के मंच पर विराजमान हैं। इसकी शुरुआत 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के द्वारा की गई थी। आज देश और प्रदेश में एनडीए की सरकार है। हम बिहार की विरासत को बढ़ाने में लगे हैं। आज भारत सरकार द्वारा बिहार सरकार के सहयोग से लगातार विकास के कार्य किये जा रहे हैं। इस मौके पर शेरघाटी विधायक मंजू अग्रवाल, जिला परिषद अध्यक्ष नैना कुमारी, उपाध्यक्ष शीतल प्रसाद यादव, नगर निगम की डिप्टी मेयर चिंता देवी ने भी समारोह को संबोधित किया।

जिलाधिकारी डॉक्टर त्याग राजन एसएम ने आगत अतिथियों का स्वागत किया एवं तीन दिवसीय बौद्ध महोत्सव में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की पूर्ण जानकारी दी। देर रात तक बॉलीवुड के पार्षद गायक अंकित तिवारी ने अपनी गायकी से समा को बांधा। उन्होंने अपने गायकी के अंदाज से युवाओं को काफी खुश किया। मैदान में जुड़ी भीड़ बेकाबू होने की स्थिति में आ गई। इससे पहले अपर मुख्य सचिव डॉ विजय लक्ष्मी द्वारा , “यशोधरा” नामक ‘भरतनाट्यम’ की प्रस्तुति दी गई। सखी हे! वह मुझसे कह कर जाते पर आधारित ‘भरतनाट्यम’ की प्रस्तुति अत्यंत ही मनमोहक और सराहनीय रही,लोगों का मन मोह लिया। इस अवसर पर कालचक्र मैदान में “ग्रामश्री” मेला व विभागीय प्रदर्शनी लगाई गई। एक स्थल पर छह टन रेत पर 10 फीट ऊंचे भगवान बुद्ध की बनाई आकर्षक कलाकृति को लोगों ने देखा।

इस मौके पर तीन पवित्र अस्थि कलश अवशेषों की महाबोधि मंदिर की वेदी पर पूजा की गई। पूजा के दौरान बीटीएमसी के सचिव महाश्वेता महारथी उपस्थित रही। महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया में जयश्री महाबोधि विहार की 18 वीं वर्षगांठ समारोह की शुरुआत पर बुद्ध और उनके दो प्रमुख शिष्यों अरहंत “सारीपुत्त” और “महामोदग्लायन” के पवित्र अवशेषों की पूजा से की गई। “अस्थि अवशेषों” को मंदिर में बेदी पर रखा गया, जहां महाबोधि मंदिर के मुख्य भिक्षु चालिंदा ने इसे प्राप्त किया। रात्रि में वियतनाम तथा कंबोडिया के कलाकारों द्वारा विशेष कला की प्रस्तुति दी गई।

दूसरे दिन 1 फरवरी को हरप्रीत कौर द्वारा गायन की प्रस्तुति, आरजू मिश्रा द्वारा गायन की प्रस्तुति, प्राची पल्लवी साहू द्वारा कत्थक नृत्य की प्रस्तुति, थाईलैंड के कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति, जापान के कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति, डा.रीता दास द्वारा सरोद वादन एवं ज्योति नूरानरा द्वारा सूफी गायन आदि कार्य क्रम शामिल हैं।

इस अवसर पर बोधगया सांस्कृतिक केंद्र में बौद्ध सेमिनार आयोजित की गई, जिसमें देश-विदेश के बौद्ध विद्वानों ने भाग लिया। सेमिनार का मुख्य विषय था-“द कॉन्सेप्ट आफ सेल्फ रिलायंस इन बुद्धिज्म एंड मेक इन इंडिया “इसकी अध्यक्षता प्रोफेसर कुसुम कुमारी ने की। वहीं मुख्य वक्ताओं में प्रोफेसर रजनीश शुक्ला, पूर्व वाइस चांसलर महात्मा गांधी हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा, प्रोफेसर शैलेश कुमार सिंह, एन कॉलेज पटना पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी, प्रोफेसर रश्मि दुबे, नव नालंदा महाविहार डॉक्टर विश्वजीत कुमार,हड पाली विभाग,नव नालंदा महाविहार,नालंदा आदि थे। सेमिनार का संचालन बौद्ध विद्वान डा.कैलाश प्रसाद एवं किरण लामा ने किया।

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