Monday, March 2, 2026
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शिवसेना और एनसीपी की बढ़ती नजदीकी से परेशान कांग्रेस नेतृत्व

शिवसेना ने मुखपत्र ‘सामना’ के जरिये कांग्रेस की दुखती रग पर हाथ रख दी है। शिवसेना की ओर से कहा गया है कि कांग्रेस को वक्त के साथ चलने की जरूरत है। वर्तमान दौर में यूपीए नेतृत्व मोदी सरकार से टकराने में अक्षम है। ऐसी स्थिति में यूपीए की बागडोर किसी और को सौंप देनी चाहिए। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस पार्टी को एनजीओ कहा है, जहां एक दो व्यक्ति सक्रिय होते हैं बाकी सभी आराम करते हैं अथवा उन्हें जिम्मेदारी का अहसास नहीं होता। सामना के संपादकीय पेज के अनुसार यूपीए के कारण ही आज विपक्ष की धार कमजोर है। इसलिए केन्द्र की सत्तारूढ मोदी सरकार पर विपक्ष के विरोध का कोई खास असर नहीं हो रहा है। सियासी परिस्थितियों को देखते हुए यूपीए का नेतृत्व ऐसे व्यक्ति को सौंपना चाहिए जो एनडीए को हर मोर्चे पर मात देने में सक्षम हो।

शिवसेना की ओर से एनसीपी प्रमुख शरद पवार का नाम आगे किया गया है। इसके बाद कांग्रेस के नेताओं की भौंहें तन गई है और शिवसेना को खास नसीहत दी गई है। कांग्रेस की ओर से स्पष्ट शब्दों मेें उद्धव ठाकरे को कहा गया है कि वह अपनी नसीहत अपने पास रखें। यूपीए के बाहर का दल और महाराष्ट्र की एक क्षेत्रीय पार्टी की सलाह कांग्रेस को नहीं चाहिए। कांग्रेस की तिलमिलाहट एनसीपी प्रमुख शरद पवार का नाम लेने पर बढ़ी है।

महाराष्ट्र की सत्ता से बीजेपी को बाहर रखने और शिवसेना की साझा सरकार बनवाने में मराठा छत्रप शरद पवार ने जो भूमिका निभायी है उसे हमेशा याद रख जायेगा। बीजेपी से महाराष्ट्र की सत्ता को छीन लेने के पीछे शरद पावर की ही सियासी चाल थी। महाराष्ट्र में शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी की साझा सरकार है लेकिन उद्धव ठाकरे और शरद पवार की बढ़त नजदीकी से कांग्रेस असहज महसूस कर रही है।

अंदरखाते की कहानी यही है कि 80 बसंत पार कर चुके शरद पवार पीएम बनने का सपना देख रहे हैं और यह तभी संभव है जब यूपीए के बैनर तले सभी विपक्षी दलों का समर्थन उन्हें प्राप्त हो। जबकि, कांग्रेस पार्टी कभी नहीं चाहेगी कि राहुल गांधी के रहते किसी और को पीएम का उम्मीदवार बनाया जाये।

जबकि, उद्धव ठाकरे ने 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष की ओर से शरद पवार को पीएम उम्मीदवार बनाये जाने पर अपनी सहमति जता दी है। महाराष्ट्र में महाअघाड़ी की सरकार बनने के बाद शिवसेना और एनसीपी के बीच नजदीकियां बढ़ी है। पहले दोनों एक दूसरे के कट्टर सियासी विरोधी थी। लेकिन अब इन दोनों की यही चाहत है कि भविष्य में भी महाराष्ट्र में शिवसेना-एनसीपी एवं सहयोगी दलों की साझा सरकार बने। ऐसा होने पर जहां महाराष्ट्र की सत्ता से बीजेपी को बाहर रहना पड़ेगा वहीं कांग्रेस भी एक सहयोगी बनकर ही रहेगी।

उद्धव ठाकरे और शरद पवार की जुगलबंदी बीजेपी के लिए तो हमेशा ही खतरा है वहीं इन दोनों की दोस्ती से कांग्रेस भी परेशान है। क्योंकि, उद्धव ठाकरे और शरद पवार की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं इस समय उफान पर हैं। शिवसेना के उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र की सत्ता पाकर गदगद है तो एनसीपी प्रमुख शरद पवार केन्द्रीय राजनीति में विपक्ष का चेहरा बनना चाहते हैं। कांग्रेस महाराष्ट्र की सत्ता में साझीदार पार्टी जरूर है लेकिन विशेषतौर पर शिवसेना और एनसीपी के बीच भविष्य की सियासत की रूपरेखा तय की जा रही है। दिल्ली के दस जनपथ में हलचल तब मची जब उद्धव ठाकरे ने यूपीए का नेतृत्व शरद पवार को सौंपने की पेशकश कांग्रेस के सामने मुखपत्र ‘सामना’ के जरिए रखी है। उसके बाद कांग्रेस के दरबारी नेताओं के कान खड़े हो गये हैं।

कांग्रेस नेतृत्व की चिंता यह है कि, शिवसेना आज यूपीए के नेतृत्व बदलने की बात कर रही है तो कल पीएम के उम्मीदवार के तौर पर शरद पवार का नाम आगे कर समस्या खड़ी कर सकती है। ऐसा होने पर विपक्ष एक धूरी पर आने से पहले ही तितर-बितर हो जायेगा। बता दें कि, यूपीए के सहयोगी दल राहुल गांधी को लेकर पहले ही दो भागों में बंटे हुए हैं। एक धड़ा राहुल गांधी के समर्थन में है तो दूसरा घड़ा राहुल गांधी का विरोधी है। ऐसे में शरद पवार के नाम पर भी यूपीए में समर्थन मिलने की फिफ्टी-फिफ्टी उम्मीद हैं।

सामना के जरिए शिवसेना का कांग्रेस नेतृत्व को लेकर लगातार कटाक्ष करने पीछे व्यापक संदेश छिपे हैं। उद्धव ठाकरे के कहने का संदर्भ यही है कि, सहयोगी दलों को इसपर गौर करने की जरूरत है कि यूपीए का नेतृत्व जब तक नहीं बदलेगा, तब तक मोदी का विरोध हम एकजुट होकर नहीं कर सकते। अभी जो हालात बन रहे हैं उससे यह तय है कि यूपीए का एक धड़ा शरद पवार का नाम आगे रखेगा। इस कड़ी में और भी नाम सामने आ सकते हैं। विपक्षी दल, घटक एवं अन्य मोर्चा केन्द्रीय सत्ता से एनडीए को बाहर करने के लिए ठोस विकल्प एवं भरोसेमंद चेहरे की तलाश में हैं, जिसपर आम सहमति बनायी जा सके।

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