April 3, 2025

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ऐतिहासिक राजकीय पितृपक्ष मेला : प्रशासनिक व्यवस्था सराहनीय है

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मोक्षभूमि-मुक्तिधाम से विश्व-प्रसिद्ध बिहार राज्य का “गया- धाम” है। यह स्थल मगध का प्रसिद्ध केन्द्र बिन्दु भी है, जो बिहार राज्य में जिला एवं अनुमंडल मुख्यालय के रूप में सुशोभित है। यह प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल अनेक राजवंशों के उत्थान और पतन का भी साक्षी रहा है। विद्वानों ने इसे प्रमुख प्रसिद्ध, ऐतिहासिक, धार्मिक एवं पुरातात्विक स्थल के रूप में माना है । महात्मा बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति भी गया (बोधगया) में ही हुई थी।

सिक्खों के परम गुरु गुरुनानक भी यहाँ आकर साधना किए थे। उनकी याद में गुरु नानकशाही स्थल आज भी विष्णुपद-मंदिर परिसर में विद्यमान है। चैतन्य महाप्रभु ने भी यहां आकर साधना की थी। बिहार के विकास हेतु तत्पर तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने गया- पितृपक्ष मेले को राजकीय मेला का दर्जा देकर एक ऐतिहासिक कार्य किया है,जिससे इस मेले का स्वरूप बदल कर भव्य बन गया है।

अब यहां पर्यटन विभाग की ओर से मेले का आयोजन होता है। इस वर्ष का पितृपक्ष मेला एक ऐतिहासिक मेला के रूप में देखा जा रहा है। इस ऐतिहासिक मेले के स्वरूप देने का श्रेय यहां के जिलाधिकारी त्यागराज एसएम तथा एसएसपी हरप्रीत कौर को जाता है। इन दोनों की सूझ-बूझ एवं अथक प्रयास का यह परिचायक है, जो भव्य एवं ऐतिहासिक मेले का रुप लिया है। देश- विदेश से लाखों की संख्या में आये यात्री यहां की प्रशासनिक सुविधा को पाकर अति प्रसन्न हो रहे हैं और उन्हें सारी सुविधाओं को मिल जाने के कारण वे अपने आप को धन्य समझ रहे हैं।

प्रशासन की वे भूरि-भूरि प्रशंसा करते नहीं थकते। जिलाप्रशासन की ओर से गया गांधी- मैदान में चार बड़े वाटर प्रूफ टेंट लगाये गए हैं, जिनमें 1500 यात्रियों के लिए नि:शुल्क गद्येदार सफेद चादर बिछा बेड,मुफ्त पानी, बिजली आदि की सुबिधा और डालमिया की ओर से मुफ्त भोजन की व्यवस्था की गई है।

प्रत्येक चौक- चौराहे पर मैजिस्ट्रेट की देख- रेख में पुख्ता सुरक्षा की भी व्यवस्था एसएसपी ने की है। दिन-रात पुलिस पेट्रोलिंग की व्यवस्था है। पूरे मेला क्षेत्र में स्वास्थ्य शिविर एवं पुलिस शिविर की उत्तम व्यवस्था है। किन्तु ,नगर प्रशासक की सफाई व्यवस्था पर यात्रियों में क्षोभ देखा जा रहा है।

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