Monday, March 2, 2026
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मोदी के खिलाफ विपक्ष का शंखनाद

विपक्षी दलों की इस मेगा रैली से यह निष्कर्ष निकलकर सामने आया कि मोदी सरकार को हर कीमत पर हटाओ और पीएम उम्मीदवार का चेहरा अभी सामने मत लाओ। हालांकि विपक्षी दलों से ही पीएम के कई दावेदार अब सामने आ रहे हैं। जिसपर अभी कोई खुलकर बोलना नहीं चाह रहा है। लेकिन दबी जुबान से कई नेता खुद ही अपनी इच्छा बयां कर रहे हैं। इसलिए बिना नीति और बिना एजेंडे की इस एकजुटता को देश का अवाम किस रूप में देख रहा है इसके लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा।

कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई में मोदी विरोधी नेताओं का एक मंच पर आने से अब यह साफ हो गया कि एनडीए के खिलाफ विपक्षी दल हर कुर्बानी देने को तैयार हैं। इस मंच पर आये कई नेताओं के बीच आपस में ही मतभेद हमेशा चर्चा के विषय रहे हैं। इस मंच पर दो दर्जन राजनीतिक दलों के अध्यक्ष और उनके प्रतिनिधि शामिल हुए जो केन्द्र से मोदी सरकार को हटाना चाहते हैं। केन्द्र सरकार के विरोध में इससे पहले इतना बड़ा हुजूम नहीं दिखा था।

हैरानी इस बात कि है कि विपक्षी दलों के साथ-साथ मोदी सरकार से असंतुष्ट बीजेपी के नेता भी इस मंच पर दिखे। जिनमें बीजेपी सांसद और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा और पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा भी मंच पर मौजूद थे। उन्होंने विपक्ष के मंच की शोभा बढ़ाने के साथ-साथ मोदी सरकार के खिलाफ जहर भी उगला है।  बीजेपी नेतृत्व उन बागी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के मूड में है।

इस मंच से लोकसभा चुनाव 2019 का शंखनाद किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ललकारा गया है। जिसके मन मे जिस तरह की भड़ास थी सभी ने मोदी सरकार पर उतार दी। शायद मोदी के खिलाफ बोलने के लिए इससे पहले इतना बड़ा मंच उन्हेें नहीं मिला हो। इस मंच से मोदी को हटाने के लिए विपक्षी एकजुटता को बनाये रखने पर बल दिया गया है।मुख्यमंत्री एवं टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने अपनी हैसियत का अहसास करा दिया है कि वह मोदी सरकार को चुनौती देने के लिए बहुत कुछ कर सकती हैं। उन्हीं की यह सियासी रणनीति थी कि विपक्षी दलों को कहीं और नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल में ही एक मंच पर आमंत्रित किया जाये। उनकी रणनीति कारगर रही और उन्होंने एक बड़ी रैली का आयोजन कर विपक्षी एकजुटता का संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास भेज दिया है।

विपक्षी दलों की इस मेगा रैली से यह निष्कर्ष निकलकर सामने आया कि मोदी सरकार को हर कीमत पर हटाओ और पीएम उम्मीदवार का चेहरा अभी सामने मत लाओ। हालांकि विपक्षी दलों से ही पीएम के कई दावेदार अब सामने आ रहे हैं। जिसपर अभी कोई खुलकर बोलना नहीं चाह रहा है। लेकिन दबी जुबान से कई नेता खुद ही अपनी इच्छा बयां कर रहे हैं। इसलिए बिना नीति और बिना एजेंडे की इस एकजुटता को देश का अवाम किस रूप में देख रहा है इसके लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा।

बहरहाल, 2019 का लोकसभा चुनाव परिणाम एक नये भारत की तस्वीर उभारेगा। परिणाम चाहे जिसके पक्ष मे हो।  बंगाल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2019 के लिए ललकारा गया है। इस मेगा रैली के माध्यम से विपक्षी दलों ने अपनी एकजुटता तो दर्शा दी है। लेकिन नीतिगत समझौते पर अभी किसी भी दल के साथ कोई बात नहीं बनी है। धूरविरोधी नेताओं की यह एकजुटता क्या रंग लाती है यह आने वाला वक्त ही बतायेगा।

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