परिवार और पार्टी से दरकिनार हो रहे तेजप्रताप यादव ने बनाया लालू-राबड़ी मोर्चा
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले में सजायाफ्ता होने के बाद रांची में जेल की सजा काट रहे हैं। उनके जेल जाने के बाद कयास लगाये जा रहे थे कि पार्टी नेतृत्वविहीन हो जायेगी। लेकिन लालू के छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने उन कयासों को गलत ठहरा दिया और राष्ट्रीय जनता दल का नेतृत्व वह एक मंझे हुए नेता की तरह कर रहे हैं। तेजस्वी यादव ने बहुत कम समय में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने में कामयाबी पायी है। तेजस्वी के समकक्ष के नेता उनके आगे फीके पड़ते दिखते हैं। उन्होंने लालू की राजनीतिक विरासत को संभालने के साथ-साथ लालू यादव के राजनीतिक अंदाज को भी संजीदगी से अपनाया है। यही कारण है कि तेजस्वी यादव लोगों में बहुत जल्दी लोकप्रिय हो गये। लालू के जेल जाने के बाद उनके दोनों बेटों तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव से पार्टी को मजबूत सहारा मिला। लेकिन पिछले कुछ महीनों से पार्टी के अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।
सियासत की शतरंजी बिसात पर विरोधियों को मात देने वाले लालू प्रसाद यादव के घर में ही शह-मात का खेल शुरू हो गया है। इसके लिए कोई बाहरी व्यक्ति जिम्मेदार नहीं है, बल्कि यह लड़ाई उनके दोनों बेटों तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव के बीच शुरू हुई है। जानकार कह रहे हैं कि यह पार्टी में उत्तराधिकार की लड़ाई है, क्योंकि पार्टी की बागडोर तेजस्वी यादव के हाथ में है। जबकि तेजप्रताप अपने लिए पार्टी में आज भी जगह तलाश रहेे है, ओहदा तलाश रहे हैं। पार्टी में जो हैसियत तेजस्वी यादव की है, शायद वही हैसियत तेजप्रताप भी चाह रहे है, लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा है। इसलिए वह पार्टी को अल्टीमेटम देकर अपना रूतबा दिखाना चाह रहे हैं, जो तेजस्वी यादव को स्वीकार्य नहीं है।
तेजप्रताप की मांगों को तेजस्वी यादव द्वारा दरकिनार किये जाने के बाद अब दोनों के बीच नफरत की दीवार खड़ी होती दिख रही है। लालू यादव के दोनों बेटों के बीच झगड़ा ऐसे समय में शुरू हुआ है जब लोकसभा चुनाव के कुछ ही दिन बचे हैं। वहीं, लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप नेें तेजस्वी को खुलेआम चुनौती दे दी है कि वह लालू-राबड़ी मोर्चा के तहत बिहार में उम्मीदवार को उतारेंगे। तेजप्रताप यादव ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा है कि बेतिया से राजन तिवारी, शिवहर से अंगेश सिंह, जहानाबाद से चंद्र प्रकाश यादव और हाजीपुर से बालेन्द्र दास को लालू-राबड़ी मोर्चा के तहत चुनावी मैदान में उतारेंगे। तेजप्रताप का कहना है कि ये सभी राजद के निष्ठावान कार्यकर्ता हैं लेकिन पार्टी में इन्हें वह सम्मान नहीं मिला जिनके वह हकदार है। इसलिए मैने इन्हें चुनाव मैदान में उतारने का फैसला किया है। इतना ही नहीं तेज प्रताप ने यहां तक कहा है कि वह राज्य में 20 लोकसभा सीटों पर मोर्चा के तहत उम्मीदवार उतार सकते हैं, और वह नेताओं का चयन कर रहे हैं। उनके मुताबिक मोर्चा में युवाओं को विशेष जगह दी जायेगी।
देखा जाये तो राजद को अब घर में ही बड़ी चुनौती मिल रही है। तेजस्वी यादव अभी इसपर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। वह सिर्फ इतना ही कह रहे हैं कि यह लोकसभा चुनाव गरीबों को न्याय दिलाने का चुनाव है। लोकतंत्र को बचाने का चुनाव है। सांप्रदायिक ताकतों को सत्ता से हटाने का चुनाव है। पीएम नरेन्द्र मोदी को हराने का चुनाव है। लेकिन पारिवारिक कलह से पार्टी और महागठबंधन प्रभावित हो रहे हैं इसपर वह गोल-मोल बाते कर रहे हैं।
बहरहाल, अब इतना तो स्पष्ट हो चुका है कि पत्नी ऐश्वर्या को तलाक देने वाले तेजप्रताप अब परिवार और पार्टी से भी दूर होते जा रहे हैं। हालांकि यह मामला पारिवारिक है लेकिन तेजप्रताप यादव के कदम से पार्टी में भूचाल जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। राजद में बगावत का झंडा उठाने वाले तेजप्रताप यादव से पार्टी और परिवार दोनों खफा हैं। राजद सुप्रीमो लालू यादव तेजप्रताप से बात नहीं करना चाहते हैं। परिवार और पार्टी नेताओं ने भी तेजप्रताप के कदम को सहीं नहीं ठहराया है। मसला यह है कि, तेजप्रताप की बिना सहमति के राजद के उम्मीदवारों का चयन कर लिया गया है। जहानाबाद और शिवहर सीट पर तेजप्रताप अपने चहेते को उतारना चाहते थे। जहानाबाद से चंद्रप्रकाश यादव और शिवहर से अंगेश सिंह के लिए तेजप्रताप ने तेजस्वी यादव से सीट मांगी थी। लेकिन उनकी मांग को तेजस्वी यादव नेे खारिज करते हुए जहानाबाद से सुरेन्द्र यादव को उम्मीदवार घोषित कर दिया। जबकि शिवहर सीट पर किसी मुस्लिम उम्मीदवार उतारने की बात चल रही है।
तेजस्वी यादव के इस फैसले के बाद तेजप्रताप पार्टी विरोधी तेवर अपनाने लगे और उन्होंने एलान कर दिया है कि जहानाबाद और शिवहर से निर्दलीय प्रत्याशी उताकर उन्हें जीताने में मदद करेंगे। इस तरह तेजप्रताप ने तेजस्वी यादव को खुलेआम चुनौती दे दी है। घर मेें मिली चुनौती ने तेजस्वी यादव को अहसहज कर दिया है। बहरहाल, तेजप्रताप ने एक अलग पार्टी बनाने का एलान करते हुए लालू-राबड़ी मोर्चा बना दिया। राजद के नेता और लालू परिवार के शुभचिंतक शिवानंद तिवारी का कहना है कि तेजप्रताप का यह कदम राष्ट्रीय जनता दल के लिए घातक साबित हो सकता है।
सूत्र बताते हैं कि, मामला तब बिगड़ा जब तेजस्वी यादव ने सारण की सीट से तेजप्रताप के ससुर चंद्रिका राय को उम्मीदवार बना दिया। तेजप्रताप का कहना है कि जिस परिवार से उन्होंने रिश्ता खत्म कर लिया वह पार्टी के लिए इतना महत्वपूर्ण नहीं हो सकता। जबकि उनके मुताबिक वह उनकी पुश्तैनी सीट है और उस सीट पर उन्होंने अपनी मां राबड़ी देवी को चुनाव लड़ने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अगर उस सीट से राबड़ी देवी चुनाव नहीं लड़ेंगी तो वह खुद उस सीट से चुनाव लड़ेंगे। विदित हो कि तेज प्रताप चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या को तलाक दे चुके हैं जिसपर अदालत में सुनवाई होनी है। दोनों की शादी बचाने की परिवारवालों ने भरपूर कोशिश की। लेकिन तेजप्रताप अपनी बात पर अड़े हैं और उन्हें ऐश्वर्या से तलाक ही चाहिए। तलाक की अर्जी देने के बाद तेजप्रताप ज्यादातर समय काशी, मथुरा और वृंदावन में बिताये। जबकि लौटने के बाद वह परिवार से अलग रह रहे हैं।
तेजप्रताप ने कई बार कहा है कि उनका परिवार ऐश्वर्या का पक्ष ले रहा है और खुद उन्हें परिवार का समर्थन नहीं मिल रहा है। शायद यही कारण है कि सारण सीट से चंद्रिका राय की उम्मीदवारी घोषित होने के बाद तेजप्रताप की प्रतिक्रिया में रिश्तों की कड़वाहट दिखी है। दोनों भाइयों के बीच लड़ाई पर अब विरोधी भी तंज कस रहे हैं। बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि जहां-जहां वंशवादी पार्टियां है और जिन-जिन पार्टियों में दो-दो दावेदार है, वहां सत्ता संघर्ष होना लाजिमी है। लेकिन तेजस्वी यादव ने तेजप्रताप के जले पर नमक छिड़का है। जिस पत्नी को तेजप्रताप ने तलाक दे दिया। उसके पिता को तेजस्वी यादव ने सारण सीट से टिकट दे दिया। आखिर ऐसा कर तेजस्वी यादव तेजप्रताप को क्या संदेश देना चाहते हैं?
बहरहाल, तेज प्रताप यादव परिवार और पार्टी से बगावत का एलान कर चुके हैं। तेजप्रताप के इस कदम पर उनके घरवाले कुछ भी बोलने से बचना चाहे रहे हैं। जबकि आलोचक कह रहे हैं कि यह उत्तराधिकार की लड़ाई है। पार्टी पर वर्चस्व की लड़ाई है। अगर लालू यादव दोनों बेटों के बीच सत्ता संघर्ष में हस्तक्षेप नहीं करते हैं तो आने वाले दिनों में पार्टी में दो फाड़ होना तय है।




