राजद्रोह कानून पर कांग्रेस पार्टी की नरमी पर हैरान हैं कानून के जानकार
लोकसभा चुनाव-2019 के मद्देनजर कांग्रेस पार्टी ने चुनावी घोषणा पत्र के माध्यम से अपने एजेंडे की ब्लूप्रिंट जारी कर दिया है। सत्ता में आने के बाद कांग्रेस जिन बिन्दुओं पर वह काम करेगी उसमें कई ऐसे मुद्दे उल्लेखित हैं, जिसे लेकर देशभर में कांग्रेस की नीति और नियति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणापत्र में गरीबी से बेरोजगारी तक उल्लेखित किया है। कांग्रेस ने अपने पूर्व के अनुभवों से सबक लेते हुए एक बेहतर घोषणापत्र पेश किया है, जिसमें गरीबी मिटाने का भी वादा किया गया है। इंदिरा गांधी के जमाने में भी गरीबी को हटाने का वादा कांग्रेस ने किया था। लेकिन देश से गरीबी कितनी हटी है यह आज भी एक बड़ा सवाल है।
बहरहाल, कांग्रेस द्वारा एक संतुलित घोषणापत्र पेश किया गया जिसमें गरीबों और बेरोजगारों पर विशेष तौर पर फोकस किया गया है। लेकिन कुछ ऐसे मुद्दों को भी घोषणापत्र में शामिल किया गया है जिसपर बीजेपी हमलावर हो गई है। इस घोषणापत्र को लेकर कांग्रेस को देशभर में बदनामी झेलनी पड़ रही है। आतंकवाद और अलगाववाद पर नरम रूख अपनाने के कारण कांग्रेस हमेशा बीजेपी के निशाने पर रही हैै। वजह चाहे जो भी हो कांग्रेस ऐसा करके एक वर्ग विशेष राजनीति को ज्यादा प्राथमिकता दे रही है।
बीजेपी जहां राष्ट्रवाद की लहर पर सवार होकर लोकसभा चुनाव जीतना चाह रही है वहीं कांग्रेस ने घोषणापत्र में अलगाववाद और राजद्रोह पर नरमी दिखाकर राष्ट्रवादी नजरिया रखने वालों के सामने एक सवाल खड़ा कर दिया है। जानकारों का कहना है कि राष्ट्रवाद और छद्म राष्ट्रवाद के बीच एक महीन लकीर है, जिसे कांग्रेस ने मिटाने का मन बना लिया है। लोगों का कहना है कि जब किसी भी देश में राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाने वालों पर नरमी बरती जाये तो वहां अराजकता फैलते देर नहीं लगेगी।
कांग्रेस ने चुनावी घोषणापत्र में राष्ट्रद्रोह कानून खत्म करने का फैसला किया है। मतलब, केन्द्र में कांग्रेस की सरकार बनती है तो देश से राजद्रोह कानून खत्म कर दिया जायेगा। राजनीतिक समीक्षक और कानून के जानकार भी कांग्रेस की इस घोषणापत्र पर आपत्ति जता रहे हैं।
कानून के जानकारों का कहना है कि लोगों में कानून का डर होना चाहिए। विशेषकर, राष्ट्रीय अस्मिता को चोट पहुचाने वाले लोेगों में राजद्रोह का भय समाप्त हो जायेगा तो देश में अराजक माहौल बन जायेगा। फिर उन हालातों से निपटने के लिए शासन-प्रशासन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। राजद्रोह कानून उन लोगोे के खिलाफ लगाये जाते हैं जो राष्ट्रीय प्रतीकों को, राष्ट्रीय संपत्तियों को एवं राष्ट्रीय अस्मिता को चोट पहुचाते हैं। छद्म धर्मनिरपेक्षवाद के कारण आये दिन इस तरह की घटनायें देश में घट रही है। ऐसे लोगों की जमात देश में तेजी से बढ़ रही है जो देश को टूकड़े-टूकड़े करने की चुनौती दे रहे हैं और राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचा रहे हैं । चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या समुदाय के हों। उसके बावजूद इस कानून को मजबूती से पालन किये जाने की जगह अगर कांग्रेस कहती है कि वह सत्ता में आने पर राजद्रोह कानून समाप्त कर देगी, इससे देश की जनता हैरान है।
विदित हो कि कांग्रेस ने अपनी चुनावी घोषणापत्र में कश्मीर से अफस्पा हटाने की बात कही है। जम्मू-कश्मीर से अफस्पा कानून के हटाने के वायदे कश्मीरियों और अलगाववादियों, आतंकियों के हित में भले ही हों लेकिन यह देश के हित में नहीं है। अफस्पा कानून के तहत भारतीय आर्मी को विशेष अधिकार मिला हुआ है। सवाल है जब इस विशेष कानून के बावजूद भारतीय आर्मी को कश्मीर में शांति बनाये रखने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, तब कांग्रेस को इस तरह की घोषणा करने की क्या जरूरत थी? घोषणापत्र के मुताबिक कांग्रेस जब केन्द्र में आयेगी तो कश्मीर से अफस्पा कानून हटा देगी। कांग्रेस ने यहां तक कहा है कि सत्ता में आने के बाद जम्मू कश्मीर में तैनात सेना में कटौती करेगी।
जम्मू-कश्मीर देश में अति संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है। पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए आतंकी हमले में स्थानीय कश्मीरी की संलिप्तता से यह साबित हो गया कि अलगाववादी और चरमपंथी समूहों के निशाने पर देश की सेना है। इन हालातों में जहां कश्मीर में शांति के लिए ठोस उपाय की जरूरत हैं वही कांग्रेस पार्टी अलगाववादियों के समर्थन में खड़ी दिखती है। कांग्रेस ने अपने एजेंडे में कश्मीर से जुड़ी धारा 370 और 35ए पर अपना रूख स्पष्ट कर दिया है। घोषणापत्र के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी कश्मीरियों के विशेषाधिकार से जुड़ी धारा 370 और 35 ए को छेड़छाड़ नहीं करेगी। जबकि यह राष्ट्रीय बहस का मुद्दा है और देश भर से इन दोनों धाराओं को हटाने की मांग की जा रही है।
केन्द्र में बीजेपी की सरकार ने अलगाववाद और चरमपंथ की कमर तोड़ दी है। सरकार ने देश विरोधी गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए विदेशी फंडिंग को रोकने के साथ-साथ कई अलगाववादी संगठनों को बैन कर दिया है। कश्मीर की अस्थिरता पर बीजेपी सरकार ने अपने संकल्प पत्र में धारा 370 और 35ए को हटाने का वायदा किया है। वहीं अलगाववाद, आतंकवाद, राजद्रोह पर कांग्रेस का नजरिया का अलग है। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में इन मुद्दों पर नरमी दिखाते हुए अपनी नीति और नियति को जाहिर कर दी है। चुनावी रैलियोें में राष्ट्रवाद और छद्म राष्ट्रवाद का नारा जोर पकड़ने लगा है। अन्य बुनियादी मुद्दों के साथ-साथ देश के सामने राष्ट्रवाद भी एक बड़ा मुद्दा है। देखना यह कि इस चुनाव में राष्ट्रवाद किस तरह की भूमिका निभाता है। लोकसभा चुनाव का दौर शुरू हो चुका है, परिणाम जानने के लिए 23 मई का इंतजार कीजिए ।




