मंझधार में नीतीश कुमार, सियासी समीकरण में उलटफेर की संभावना
प्रचंड बहुमत से आयी मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में बीजेपी के सांसदों को ही खास जगह दी गई है। जबकि सहयोगी दलों के गिने-चुने सांसद ही कैबिनेट में शामिल किये गये हैं। बिहार में बीजेपी-जदयू और लोजपा ने मिलकर चुनाव लड़े और 40 लोकसभा सीटों में से 39 सीटों पर जीत दर्ज की। इसलिए कहा जा रहा था कि जदयू के कई सांसदों को केन्द्रीय कैबिनेट में जगह दी जायेगी। मंत्रिमंडल विस्तार से पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात भी हुई थी।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयानों के मुताबिक, अमित शाह केन्द्रीय कैबिनेट में जदयू को सांकेतिक प्रतिनिधित्व देना चाहते थे। मतलब, उनको हमारे सांसदों की जरूरत नहीं है। इसलिए जदयू ने मंत्रिमंडल विस्तार में हिस्सा लेने से मना कर दिया। हालांकि मुख्यमंत्री ने कहा है कि केन्द्र की एनडीए सरकार को जदयू का समर्थन मिलता रहेगा। लेकिन केन्द्रीय कैबिनेट में जदयू को जगह नहीं दिया जाना सियासी सुर्खियां बन गई है। बीते-चार पांच दिनों से बिहार की राजनीति के अंलग ही रंग दिख रहे हैं। महागठबंधन के नेताओं ने नीतीश कुमार पर तंज कसना शुरू किया कि बीजेपी ने अपना असली चेहरा दिखा दिया। जदयू को बीजेपी ने कोई भाव नहीं दिया है।
नीतीश कुमार को महागठबंधन के कुछ नेताओं की बातें चुभ गई। उसके बाद उन्होंने जो कदम उठाया उसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। नीतीश कुमार ने बीजेपी से दो कदम आगे चलने का मन बना लिया है। उन्होंने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर बीजेपी को संदेश दिया है कि गठबंधन धर्म निभाने की जिम्मेदारी दोनों की है। उन्होंने बीजेपी नेतृत्व को उसी की भाषा में जवाब देने की योजना बना ली।
बिहार सरकार ने मंत्रिमंडल के विस्तार का फैसला किया और 8 नये मंत्रियों की शपथ दिलायी। गठबंधन दल बीजेपी और लोजपा से एक भी मंत्री नहीं बनाये गये। बिहार सरकार द्वारा मंत्रीमंडल का विस्तार किया जाना और बीजेपी-लोजपा को मंत्रीमंडल में शामिल नहीं किये जाने के संदेश दूर तक जायेंगे। नीतीश कुमार ने बीजेपी से हिसाब-किताब बराबर कर लिया है। मामला यही थमता नहीं दिख रहा हैं। बिहार के सियासी हालात बता रहे हैं कि बीजेपी और जदयू के बीच रिश्ते तल्ख होते जा रहे हैं।
जले पर नमक महागठबंधन के नेता छिड़क रहे हैं। राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा है कि नीतीश कुमार कभी भी पलटी मार सकते हैं। वह कब क्या कदम उठा लेंगे यह कोई नहीं जानता। रालोसपा के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा है कि मोदी-2 सरकार नीतीश कुमार से ज्यादा उम्मीद पालकर न बैठे। मोदी सरकार धोखा पार्ट-2 देखने के लिए तैयार रहे। नीतीश कुमार सहयोगियों को धोखा देने के लिए भी जाने जाते हैं।
जबकि, नीतीश कुमार विरोधियों को मात देना भी जानते हैं। वह स्पष्टवादी है और जो कुछ भी करते हैं डंके की चोट पर करते हैं। सियासी मतभेदों के कारण 17 साल पुराने जदयू-बीजेपी गठबंधन को तोड़ देना, जीतन राम मांझी को बिहार की सत्ता सौंप देना, धूरविरोधी राजद के साथ गठबंधन करने और सरकार बनाने के बाद एक झटके में राजद गठबंधन से अलग हो जाना। फिर बीजेपी के साथ मिलकर बिहार में सरकार बना लेना। ये सारी खासियतें नीतीश कुमार में देखी जा सकती है। उनके इस कदम को देखकर यह कहा जा सकता है कि वह सत्ता की लालच और अपने सियासी भविष्य की परवाह नहीं करते हैं। जिनके साथ उनकी सियासी तालमेल नहीं बैठती है उनसे रिश्ते खत्म कर लेना नीतीश कुमार के लिए बड़ी बात नहीं है।
बिहार में सियासी दलों द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टी के बाद सियासत के नये रूप और तेवर दिख रहे हैं। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने अपने आवास पर इफ्तार पार्टी में नीतीश कुमार को शाामिल होने का न्यौता भेजा। हालांकि नीतीश कुमार वहां नहीं गये। बीजेपी की इफ्तार पार्टी से भी नीतीश कुमार ने दूरी बना ली। लेकिन हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी की इफ्तार पार्टी में नीतीश कुमार के शामिल होने के बाद बिहार की सियासत फिर करवटें लेने लगी है। बीजेपी-जदयू के झगड़े को भूनाने की कोशिश में विपक्ष जुट गया है। नीतीश कुुमार को महागठबंधन में पुनः शामिल होने के ऑफर दिये जाने लगे हैं। नीतीश कुमार से मेलजोल बढ़ाते कई विरोधी नेता देखे जा रहे हैं।
महागठबंधन के नेता अब कहने लगे हैं कि नीतीश कुमार का बीजेपी से मोहभंग हो गया है और वह जल्द ही कोई निर्णय लेने वाले हैं। सबसे पहले जीतन राम मांझी ने कहा कि अगर बीजेपी में आपका दम घुट रहा है तो महागठबंधन में चले आइये। हम आपके स्वागत के लिए तैयार हैं। राजद की ओर से भी नीतीश कुमार को ऑफर मिलने शुरू हो गये हैं। राबड़ी देवी ने भी कहा कि आप बीजेपी को छोड़कर महागठबंधन में शामिल हो जाइये। दोनों की मुलाकात जीतन राम मांझी की इफ्तार पार्टी में हुई।
राजद के प्रवक्ता मनोज झा ने तो यहां तक कह दिया कि नीतीश कुमार के दोबारा महागठबंधन में शामिल होने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है। इस मसले पर जदयू के प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा है कि हम सत्ता के लिए राजनीति में नहीं आये हैं। जदयू की सरकार ने विकास को पहली प्राथमिकता दी है। केन्द्र और राज्य के सियासी मसलों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो भी कदम उठायेंगे वह पार्टी के हित में उठायेंगे।
हालांकि, लोजपा नेता और केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान का कहना है कि एनडीए में सबकुछ ठीक है। नीतीश कुमार एनडीए के साथ हैं। रामविलास पासवान ने ऑल इज वेल कहा है। लेकिन बीजेपी-जदयू के बीच सबकुछ पहले की तरह नहीं है। बिहार की राजनीति फिर दोराहे पर खड़ी दिख रही है। क्योंकि नीतीश कुमार फिर महागठबंधन के जाल में फंसते दिख रहे हैं। महागठबंधन के नेता गोल-गोल बातें कर नीतीश कुमार को यह अहसास दिला रहे हैं कि बीजेपी ने आपके साथ बहुत बुरा किया है। आप बीजेपी से सियासी रिश्ते खत्म कर हमारे साथ आइये। हम सभी आपके लिए सियासी कार्पेट बिछाये हुए हैं। बीजेपी और जदयू के रिश्तों में खटास को महागठबंधन अपने हित में देख रहा है।




