अरविंद केजरीवाल सरकार के कार्यकाल में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में काफी सुधार हुए हैं।
दिल्ली सरकार ने शिक्षा का जो मॉडल पेश किया है उसकी तारीफ देश ही बल्कि विदेशों में भी हो रही है। गत दिनों भारत दौरे पर आये बांग्लादेश के शिक्षा मंत्री मोहम्मद जाकिर ने दिल्ली सरकार से मिलकर शिक्षा के क्षेत्र में किये जा रहे सुधार कार्य की प्रशंसा की है। दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मोहम्मद जाकिर को दिल्ली के कई स्कूलों में ले जाकर स्कूलों के विकास का प्रमाण दिखाया। बांग्लादेश के मंत्री दिल्ली के सरकारी स्कूलों को देखकर हैरान रह गये।
सरकारी स्कूलों में आधुनिक स्तर के क्लासरूम, लाइब्रेरी, कोरिडोर, वाशरूम, तकनीकी शिक्षा के लिए अलग क्लासरूम सहित अन्य आधुनिक सुविधायें मुहैया करायी गयी है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के नेतृत्व किये जा रहे शैक्षणिक विकास कार्य पर नजर डालें तो यह हैरान करने वाला है। दिल्ली सरकार का दावा है कि शिक्षा के क्षेत्र में आम आदमी पार्टी की सरकार ने जो विकास किया है उसकी तुलना देश के किसी भी राज्य से नहीं की जा सकती है। दिल्ली के सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूलों को चुनौती दे रहे हैंं। सरकारी स्कूलों का ढर्रा दिल्ली सरकार ने बदल दिया है। इसलिए पढ़ाई के साथ-साथ परीक्षा परिणामों से भी दिल्ली के सरकारी स्कूलों का आकलन किया जा सकता है।
दिल्ली सरकार का मानना है कि शिक्षा का अधिकार सभी को मिला है तो गरीबों और मजदूरों के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा का प्रबंध करना सरकार का कर्तव्य होना चाहिए। अमीर अभिभावक स्कूलों में सुविधाओं और शैक्षणिक माहौल को लेकर भी प्राइवेट स्कूलों की ओर रूख करते हैं। अगर सरकारी स्कूलों में वो सारी सुविधाएं मुहैया करा दी जाये तो गरीब बच्चों का भी भविष्य बेहतर बन सकता है। सिसेादिया के मुताबिक, इसलिए हमने सरकारी स्कूलों का कायाकल्प कर दिया है। ताकि गरीब बच्चे भी बेहतर शिक्षा प्राप्त कर अपने भविष्य का निर्माण कर सकें। आप सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर को भविष्य की पूंजी बताया है।
कुछ दिनों पहले ऐसोचैम द्वारा कराये गये अभिभावक संतुष्टि सर्वेक्षण में कहा गया कि देश के अन्य राज्यों को स्कूलों की शिक्षा प्रणालियों, शिक्षा मॉडल, शिक्षा की गुणवत्ता और स्कूलों के लिए जरूरी सुधार के लिए दिल्ली सरकार का अनुसरण करना चाहिए। राज्य सरकारों कोे इससे प्रेरणा लेनी चाहिए कि बजट का एक बड़ा हिस्सा दिल्ली सरकार शिक्षा पर खर्च कर रही है।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि, सरकारी स्कूलों में शिक्षा के गुणवत्ता को लेकर अभिभावकों का नजरिया दिल्ली सरकार ने बदला है। हर अभिभावक चाहतें हैं कि उनके क्षेत्र के स्कूलों में अच्छी सुविधाएं हो। दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया की पहल रंग लाती दिख रही है।
सरकारी स्कूलों को लेकर मन-मस्तिष्क में जो चित्र उभरते है, जिनमें टूटी-फूटी बेंच, गंदगी, टीचरों की लेटलतीफी, शिक्षण गुणवत्ता में कमी, शैक्षणिक परिवेश का नहीं होना, स्कूलों में जरूरीं संसाधनों का न होना… इत्यादी। लेकिन दिल्ली सरकार ने इस भ्रांति को तोड़ दिया है। आप दिल्ली के सरकारी स्कूलों के क्लासरूम को देखकर हैरान रह जायेंगे। शैक्षणिक परिवेश को देखकर ऐसा लगता है कि मानों आप किसी प्रतिष्ठित निजी विद्यालय में खड़े हों।
सरकारी स्कूलों के शिक्षा ग्रहण के तौर तरीकों को आज तकनीक से जोड़ना बदलते दौर की मांग है। इसलिए दिल्ली के सरकारी स्कूलों में तकनीकी और व्यवसायिक शिक्षा पर भी जोर दी जा रही है। कुछ सरकारें सिर्फ शिक्षा को लेकर खानापूर्ति करती है लेकिन दिल्ली सरकार ने इसे यथार्थ में बदलकर दिखा दिया है कि देश की उन्नति बच्चों के भविष्य के भविष्य पर टिकी है। इसलिए दिल्ली सरकार ने बजट का 25 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करने का फैसला कर देश को चौंका दिया था। शिक्षा के क्षेत्र में दिल्ली सरकार ने कई उल्लेखनीय कार्य किया है।
सूत्र बताते हैं कि, अब तक 15 हजार क्लासरूम तैयार किये गये हैं एवं 54 नये स्कूलों के भव्य निर्माण किये गये हैं। कुछ स्कूल निर्माणाधीन हैं। स्कूलों में शौचालय, वाशरूम में साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था है। शिक्षकों को प्रर्याप्त ट्रेनिंग की व्यवस्था की गई है। जबकि बच्चों को बेहतर फैसला लेने, स्वावलंबी बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने स्कूलों में हैप्पीनेस क्लास शुरू करवायी है। जिसमें बच्चों को पर्सनालिटी डेवलपमेंट सहित अन्य व्यवहारिक शिक्षा दी जा रही है, ताकि वह अपने भविष्य के प्रति जागरूक रहें। इतना ही नहीं शिक्षा माफियाओं पर नकेल कस कर दिल्ली सरकार ने प्राइवेट स्कूलों की भी फीस कम करायी है, जिससे कि वहां भी गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चें पढ़ सकें। शिक्षा नीति को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने जमीनी स्तर के हालातों को पहले जाना और समझा। उसके बाद दिल्ली सरकार ने दिल्ली की शिक्षा मॉडल को ही बदल दिया। अब उसके परिणााम भी सामने दिखने लगे हैं। दिल्ली के सरकारी स्कूलों के बच्चे अब योग्यता और परीक्षा परिणामों में प्राइवेट स्कूलो के बच्चों को चुनौती दे रहे हैं। ऐसा दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के सार्थक प्रयासों से संभव हो पाया है।
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