
प्रतिमा विसर्जन के दौरान की गई पत्थरबाजी के बाद दो सम्प्रदायों के बीच हिंसक वारदात ने जहानाबाद को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया है। इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी, पत्रकार, वार्ड प्रतिनिधि और वरिष्ठ नागरिक भी घायल हो गये हैं।
बिहार का जहानाबाद जिला जो 80 के दशक से लगभग 2005 तक नक्सली वारदातों के लिए देश में सुर्खियों में रहा, लेकिन कभी इस जिले में साम्प्रदायिक दंगे नहीं हुए। विशेषकर सभी वर्गो के बीच आपसी सदभाव और सामंजस्य ने कभी भी इस जिले पर साम्प्रदायिक दंगा का दाग नहीं लगने दिया। जहानाबाद में कभी ऐसी नौबत नहीं आयी कि रोज एक दूसरे को सलाम-नमस्ते करने वाले एक दूसरे के खून के प्यासे बन जायें। इसी कारण जहानाबाद को साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल दी जाती थी। लेकिन… अब हालात बदल गये हैं। इसे आप इत्तेफाक कहें या बड़ी साजिश का हिस्सा, लेकिन यह सच है कि आज जहानाबाद साम्प्रदायिक दंगे की आग में जल रहा है।
प्रशासनिक सक्रियता के कारण दुर्गा पूजा के दौरान किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं घटी। लेकिन प्रतिमा विसर्जन के दौरान द्वारा की गई पत्थरबाजी के बाद दो सम्प्रदायों के बीच हिंसक वारदात ने जहानाबाद को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया है। दोनों तरफ से हुई पत्थरबाजी के कारण जान-माल की भी भारी छति हुई है। कई दुकाने जला दी गई, कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। इस घटना के बाद जिले के कई हिस्सों में साम्प्रदायिक तनाव देखें जा रहे हैं। प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद हालात नियंत्रण में नहीं आये तो जिला में धारा 144 लागू कर दिया गया और इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई। स्कूल, कॉलेज, दुकान, बैंक…सभी बंद हैं। रोजमर्रा की चीजें भी लोगों को नहीं मिल पा रही है। पुलिस ने लोगों को सड़क पर निकलने पर पाबंदी लगा दी है। जिले के लोग अपने-अपने घरों में कैद हैं। पुलिस प्रशासन की चौकसी लगातार बनी हुई है।
सूत्र बताते हैंं कि विसर्जन जुलूस को एनएच-83 से होकर पंचमहल्ला के रास्ते संगम घाट जाने का तय रूट हमेशा से ही रहा है। इस बार भी प्रशासन ने प्रतिमा विसर्जन के लिए वही रूट तय किया। लेकिन पंचमहल्ला के नजदीक आते ही कुछ लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी जिससे प्रतिमा भी छतिग्रस्त हो गई।
अचानक पत्थरबाजी किये जाने पर मूर्ति छतिग्रस्त होने के बाद विसर्जन में शामिल लोग उग्र हो गये। फिर दोनों तरफ से हुई पत्थरबाजी ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया। इसमे दोनों पक्षों के कई लोग घायल हो गये हैं। इतना ही नहीं हालात को काबू करने गये कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से जख्मी हो गये हैं, जिनका इलाज सदर अस्पताल किया जा रहा है। पुलिस को बचाव में फायरिंग करनी पड़ी है। इस हिंसा में कई पत्रकार, वार्ड प्रतिनिधि और वरिष्ठ नागरिक भी घायल हो गये हैं। प्रतिमा विसर्जन में शामिल लोगों का कहना है कि पत्थरबाजी योजनाबद्ध तरीके से की गई थी।
विसर्जन में शामिल लोगों का गुस्सा इस चरम पर पहुंच गया कि सभी प्रतिमाओं को बीच सड़क पर ही छोड़ दिया और शरारती तत्वों की गिरफ्तारी के बाद ही प्रतिमा विसर्जन का फैसला किया। प्रशासन द्वारा काफी मान मनौव्वल करने के बाद करीब 12 घंटे के बाद लोग प्रतिमा विसर्जन को राजी हुए हैं। इस घटना में अब तक लगभग 30 से ज्यादा शरारती तत्वो को प्रशासन ने गिरफ्तार किया है। जिले के डीएम, एसपी, डीएसपी सहित कई आला अधिकारी तमाम हालातों पर निगरानी रखे हुए हैं।
प्रशासन ने हालात को नियंत्रित करने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स को सडकों पर उतार दिया है, लेकिन हिंसक वारदातें नहीं थम रही है। जिले में चप्पे-चप्पे पर पुलिस-प्रशासन की मुस्तैदी के बावजूद दूसरे दिन भी हालात काबू में नहीं हैं। इस दंगे की आंच शहर से जुड़े गांवों और प्रखण्डों में भी फैलने लगी है। जाफरगंज मोहल्ले में एक 22 वर्षीय छात्र की हत्या कर दी गई। इस हत्या की खबर फैलते ही जिले के कई हिस्सों में दोनों पक्षों में जमकर रोड़ेबाजी हुई। जिले के विभिन्न इलाकों में लूट एवं आगजनी की वारदातें बढ़ती जा रही है। प्रशासन शरारती तत्वों के आगे बेबस दिख रहा है।
हालात अभी भी बेकाबू हैं और ऐसा कब तक रहेगा, कुछ कहा नहीं जा सकता।




