केन्द सरकार ने कश्मीर से धारा 370 हटा दिया तो विपक्षी और अलगाववादी नेताओं को यह हजम नही हो रहा है । वह इसे कश्मीरियों की अभिव्यक्ति पर हमला करार दे रहे हैं। इन सभी का कहना है कि कश्मीर से 370 हटाने से पहले कश्मीरियोें से राय क्यों नहीं ली गई। इस संदर्भ में विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पार्टी के नेता अजीब-अजीब बयान दे रहे हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा है कि कश्मीर से धारा 370 हटाना बीजेपी सरकार का गलत फैसला है। सरकार ने अपने हाथ जला लिये हैं। सरकार की तानाशाही रवैया के कारण कश्मीर हाथ से निकल जायेगा। कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओें में शामिल पी. चिदम्बरम ने तो जहर उगला है। उन्होंने इस मसले को हिन्दू-मुस्लिम मे तब्दील कर दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर कश्मीर हिन्दू बहुल क्षेत्र होता तो केन्द्र सरकार वहां से धारा 370 नहीं हटाती।
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर जब भी सुर्खियो में आते हैं तो वह अपने विवादास्पद बयानों के कारण ही। इससे पहले भी उन्होंने कई बार विवादास्पद बयान देकर कांग्रेस पार्टी के सामने मुश्किलें खड़ी की है। अब धारा 370 हटने के बाद उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार जम्मू-कश्मीर को उत्तर भारत का फलीस्तीन बनाने पर आमदा है, क्यांेकि सरकार कश्मीरियों की आवाजों को दबाने पर तुली है।
गुलाम नबी आजाद से जब पत्रकारों ने वहां के हालातों के बारे में पूछा कि सरकार के नये फैसले के कश्मीर एकदम शांत हो गया है, लोग सरकार के फैसले का स्वागत कर रहे है, इसपर आपकी क्या राय है तो, उन्होंने कहा कि पैसे लेकर कुछ भी संभव है। मतलब, कश्मीरी जनता को इन्होंने बिकाऊ करार दिया है। इस बयान के बाद गुलाम नबी आजाद की काफी किरकिरी हो रही है।
जबकि कांग्रेस पार्टी में कुछ ऐसे भी नेता हैं जिन्हें लगता है कि मोदी सरकार द्वारा धारा 370 हटाया जाना देश की एकता और अखंडता के लिए अच्छा कदम है। पार्टी लाइन से अलग बात करने में ज्योतिरादित्य सिंधिया, मिलिंद देवड़ा, दीपेन्द्र हुडा और जनार्दन द्विवेदी का नाम शामिल है। जिन्होंने मोदी सरकार के फैसले का स्वागत किया है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस के युवा नेता है और राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाते हैं। पार्टी में युवा नेता के तौर उनकी एक अलग पहचान है और कांग्रेस ने उन्हें कई जिम्मेदारियां भी सौंपी है। लोकसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था। इसलिए कांग्रेस में वह पार्टी के प्रति काफी विश्वस्त नेता के रूप मे जाने जाते हैं। लेकिन पहली बार उन्होंने पार्टी लाइन से अलग बयान दिया है। उन्होंने ट्वीटर के माध्यम से कहा है कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख को लेकर उठाये गये मोदी सरकार के फैसले से मैं सहमत हूं, और उनके पूर्ण एकीकरण का समर्थन करता हूं। यह फैसला राष्ट्रहित में लिया गया है।
मुंबई कांग्रेस के युवा नेता मिलिंद देवड़ा ने भी मोदी सरकार के फैसले को देश हित मे बताते हुए कांग्रेस पार्टी को सकते में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि धारा 370 को उदारवाद बनाम रूढ़ीवाद में तब्दील कर दिया गया है। पार्टियों को अपनी विचारधारा से अलग होकर बहस करनी चाहिए कि भारत की संप्रभूता और संघवाद, जम्मू-कश्मीर में शांति, कश्मीर के युवाओं को नौकरी और कश्मीरी पंडितों को न्याय के लिए बेहतर क्या है।
हरियाणा कांग्रेस के सबसे युवा नेता दीपेन्द्र हुडा ने मोदी सरकार द्वारा धारा 370 हटाये जाने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि सरकार के फैसले को देश हित में देखा जाना चाहिए। दीपेन्द्र हुडा ने ट्वीट में लिखा कि, यह मेरी व्यक्तिगत राय है, 21वीं सदी में अनुच्छेद 370 का कोई औचित्य नहीं है। यह सिर्फ देश की एकता और अखंडता के लिए ही नहीं बल्कि, जम्मू-कश्मीर जो हमारे देश का अभिन्न अंग है, उसके हित में भी है।
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी ने भी धारा 370 के हटाये जाने को लेकर कहा है कि इतिहास की एक गलती को सुधारा गया है और इसे संविधानिक नजरिये से देखा जाना चाहिए। पार्टी के इन नेताओं के द्वारा मोदी सरकार के फैसले के पक्ष में बयान दिये जाने के बाद गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि धारा 370 के बारे में इन्हें कुछ नहीं पता है। यह इनका व्यक्तिगत बयान हो सकता है, पार्टी को इनके बयान से कोई लेना-देना नहीं है। पार्टी अपने स्टैंड पर कायम हैं।
लेकिन, पार्टी में वैचारिक विरोधाभास से कांग्रेस हाईकमान को चिंता सता रही है। कांग्रेस पार्टी आज तक दोहरे चरित्र के सहारे राजनीति करती रही। लेकिन अब कांग्रेस की कलई अपने आप खुल रही है। सही को सही और गलत को गलत कहने वाले अब पार्टी में भी मुखर होने लगे हैं। कांग्रेस हाईकमान और थिंक टैंक को भी यह पता है कि पार्टी के युवा नेताओं की बातों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। युवा चेहरों की बदलती सोच से कांग्रेस हाईकमान परेशान हैं। बहरहाल, कश्मीर का मसला कांग्रेस को विकट परिस्थिति में ला दिया है।




