बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र का निधन दिल्ली के एक अस्पताल में हुआ एवं उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक स्थान सुपौल स्थित बलुआ गांव लाया गया। दिवगंत जगन्नाथ मिश्र के सम्मान में राज्य सरकार ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। अंतिम संस्कार के समय बिहार पुलिस के 22 राइफलधारियों द्वारा जगन्नाथ मिश्र को सलामी दी जा रही थी, लेकिन ऐन वक्त पर एक भी बंदूक से गोली नहीं चली।
खास बात यह है कि उस वक्त बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी सहित अनेक मंत्री एवं अधिकारी मौजूद थे। यह बिहार की पुलिस प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी हास्यास्पद है कि सभी बंदुकों ने एक साथ धोखा दिया है। इस अजीबोगरीब हालात पर देशभर में बिहार पुलिस का मजाक उड़ रहा हैं।
सुशासन के बड़े-बड़े दावे करने वाली नीतीश कुमार की सरकार में ऐसा हुआ है तो इसे सामान्य घटना नहीं मानी जानी चाहिए। एक दो बंदूकें अगर धोखा दे देती तो यह चर्चा का विषय नहीं बनता। लेकिन 22 बंदुकों में से एक भी बंदूक से गोली नहीं चल पायी। अब इस मामले पर कोसी रेंज के डीआईजी कह रहे हैं कि दोषियों पर कार्रवाई की जायेगी। जांच का जिम्मा सुपौल के डीएसपी को दी गई है। पुलिस विभाग की इतनी बड़ी खामियां सामने आने पर लोग सुरक्षा को लेकर बिहार की शासनिक-प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल भी खड़े कर रहे हैं। इससे बिहार पुलिस की किरकिरी हो रही है और सरकार कुछ भी बोलने से बचना चाह रही है।
बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे पुलिस व्यवस्था को चुस्त-दुरूस्त रखने के लिए पूरी मशक्कत कर रहे हैं। पुलिस की कार्यशैली को जानने के लिए वह कई बार स्पॉट पर पहुंच जाते हैं और किसी को पता भी नहीं चलता। डीजीपी बनने से पहले वह आरक्षी अधीक्षक के तौर पर जिन-जिन जिलों से पदस्थापित हुए, उन जिलों की पुलिसिंग सिस्टम को उन्होंने काफी हद तक सुधार दिया। डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे की अपराध पर नियंत्रण करने की अपनी शैली है। इसलिए राज्य सरकार ने कई जटिल केसों को गुप्तेश्वर पांडे को सौंपा।
डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे बिहार पुलिस से दो कदम आगे चल रहे हैं यह तो सभी जानते हैं, लेकिन बिहार में बढ़ते अपराध और बेखौफ अपराधी पुलिस के लिए चुनौती हैं। अब जंग लग चुकी बंदूकों के सहारे बिहार में अपराध पर नियंत्रण करना बिहार पुलिसकर्मियों के लिए कितनी बड़ी चुनौती हैै, यह उनसे बेहतर कौन जान सकता है।
एक तरफ नक्सली एवं संगीन आपराधिक तत्व अत्याधुनिक हथियार से वारदात को अजाम दे रहे है वहीं बिहार पुलिस को पुराने हथियारोें से ही उनका मुकाबला करना पड़ता है। जगन्नाथ मिश्र के अंतयोष्टि के समय बिहार की पुलिस कार्यबल की पोल खुल गई । बिहार में इतने पुराने राइफल अब भी इस्तेमाल में लाये जा रहे हैं जिसकी नाल से गोली नहीं निकल पा रही है। बिहार सरकार एवं आला अधिकारियों के लिए यह गंभीर चिंतन का विषय है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस मामले पर विशेष कदम उठाने की जरूरत है।




