Monday, March 2, 2026
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दिल्ली हिंसा: नफरत की फसल को खाद-पानी कौन दे रहा है ?

सीएए विरोध के नाम पर मुसलमानों को सड़कों पर उतारकर कुछ सियासी पार्टियों ने अपना हित साधने का काम किया। विरोध के नाम पर ऐसा माहौल तैयार कर दिया गया कि प्रदर्शनकारियों के आगे शासनिक और प्रशासनिक व्यवस्था लाचार दिखी।  कुछ नेता अपने बयानों से अल्पसंख्यकों के इस विरोध प्रदर्शन को हिंसक बनाने का काम बहुत पहले ही कर चुके थे। विवादित बयानों की लंबी फेहरिश्त है और अगर जांच का दायरा बढ़ा तो गाज उन सभी पर गिर सकती है, जिन्होंने फिजा में जहर घोलने का काम किया है।

दिल्ली की हिंसा सुनियोजित साजिश है ?

सीएए विरोध के नाम पर शुरू हुई इस हिंसा ने दिल्ली को झकझोर कर रख दिया है। उत्तर पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में तीन दिनों तक चला हिंसा का यह तांडव जान-माल की भारी छति के बाद धीरे-धीरे शांत होता दिख रहा है। इस हिंसा में कई जिंदगियां खत्म हो गई एवं कई लोग धायल और गंभीर हालत में हैं। कई मकानों एवं दुकानों को उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दिया गया। सैकड़ों गाड़ियां जलकर राख हो गई। उपद्रवी धर्म की पहचान करके एक दूसरे को मारने लगे। हिंसा के इस खौफनाक मंजर को देखकर स्थानीय लोग अब भी भयभीत हैं।

इस हिंसा की तहकीकात शुरू हो चुकी है। जांच का दायरा जैसे-जैसे बढ़ता जा रहा है, चीजें बहुत कुछ स्पष्ट होती जा रही हैं। दिल्ली पुलिस ने एक मकान से कई सूबतों (पेट्रोल बम, गुलेल, तेजाब, ईट, पत्थर, रॉड, इत्यादि) को इकट्ठा किया है, जिसके आधार पर जांच अधिकारी इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि दिल्ली में हिंसा एक सुनियोजित साजिश के तहत हुई है। वह मकान ताहिर हुसैन का बताया जा रहा है।

बता दें कि, इस हिंसा के लिए कपिल मिश्रा के भड़काऊ बयान को जिम्मेदार ठहराया जा रहा था। लिबरल, वामपंथी, कथित छद्म सेक्युलर नेता मीडिया में चीख-चीख कर कह रहे थे कि इस हिंसा के लिए कपिल मिश्रा और दिल्ली पुलिस जिम्मेदार है। लेकिन धीरे-धीरे इस हिंसा के पीछे का सच सामने आ रहा है। इस दंगे में आम आदमी पार्टी के एक पार्षद का नाम आने पर मीडिया में रूदाली करने वाले लोग अचानक गायब हो गये हैं और जो सामने आ रहे हैं उनके तेवर बदले हुए दिख रहे हैं।

आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन को इस हिंसा का सूत्रधार बताया जा रहा है। उनके घर और कार्यालय से कई ऐसी वस्तुएं बरामद की गई है, जिसके इस्तेमाल इस दंगे में किये गये। ताहिर हुसैन की छत पर से ईट-पत्थर और पेट्रोल बम सड़क पर फेके जा रहे थे, जिससे कई घायल हो गये हैं। इससे संबंधित कई वीडियो वायरल हो रहे हैं।

छत पर बड़ी मात्रा मे तेजाब और पेट्रोल की पैकिंग थैलियां पायी गई। इट-पत्थरों की कई बोरियां, गुलेल सहित कई वस्तुुएं बरामद की गई है। पुलिस ने उन सभी सबूतों को बरामद कर लिया है। ये सारे सबूत इत्तेफाक नहीं हो सकते। ताहिर हुसैन ने सफाई देते कहा है कि उन्हें साजिशन फंसाया जा रहा है।

ताहिर हुसैन पर आरोप लगने के बाद पहले तो उनके बचाव में आम आदमी पार्टी उतर गई। आप नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने ताहिर हुसैन को दंगा पीडित बताते हुए उनपर लगे तमाम आरोपों को खारिज कर दिया। संजय सिंह के बयान को देखने एवं सुनने वालों को हैरानी हुई कि आम आदमी पार्टी इतनी जल्दी कैसे इस निष्कर्ष पर पहुुच गई कि ताहिर हुसैन बेकसूर है। संजय सिंह को जांच रिपोर्ट आने तक तो इंतजार करना चाहिए।

जबकि, कपिल मिश्रा का स्पष्ट तौर पर कहना है का इस हिंसा का सूत्रधार ताहिर हुसैन है और अगर जांच का दायरा बढ़ता तो आम आदमी पार्टी के कई और नेताओं के नाम सामने आयेंगे। वहीं भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने इस हिंसा के लिए ताहिर हुसैन को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि दिल्ली में हुए दंगे एक सुनियोजित साजिश हैं। कांग्रेस पार्टी ने भी आम आदमी पार्टी को घेरना शुरू कर दिया।

आम आदमी पार्टी अपने पार्षद के कारण चौतरफा धिरने लगी, सियासी पार्टियां आप पर हमलावर हो गई । तब अंततः दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को मीडिया के समक्ष आकर कहना पड़ा कि, अगर दिल्ली में हुई हिंसा में आम आदमी पार्टी का कोई भी नेता शामिल पाया जाता है तो उसे दोगुनी सजा मिलनी चाहिए। देर रात ताहिर हुसैन को पार्टी से निकाल दिया गया है।

केजरीवाल के इस कदम पर लोग पूछने लगे कि जब आम आदमी पार्टी का ही विधायक शाहीनबाग में खुलेआम लोगों को सड़क पर उतरने के लिए भड़का रहा था, धर्म के नाम उन्हें डरा रहा था तो उस समय आपने अपने विधायकों पर क्यों नहीं सख्ती बरती। क्योंकि इस बात को नकारा नहीं जा सकता है कि राजनीतिक पार्टियों ने शाहीनबाग को दिल्ली चुनाव के मद्देनजर एक सियासी प्रयोगशाला बना दिया था। क्रिया-प्रतिक्रिया स्वरूप जो जो परिस्थितियां पैदा हुई है उसे दिल्ली में हुई हिंसा से जोड़कर जरूर देखा जाना चाहिए।

पिछले ढाई महीने से शाहीनबाग में विरोध प्रदर्शन के नाम पर, विवादित बयानोें से लोगों को धर्म के नाम पर, कॉम के नाम पर भड़काया जा रहा है। उससे दिल्ली की फिजा जहरीली होने लगी और लोगों के दिलों में नफरत और द्वेष की भावना बढ़ने लगी। शाहीनबाग से भड़की चिंगारी ने धीरे-धीरे आग का रूप अख्तियार कर लिया और उसके परिणामस्वरूप अमन और भाईचारे की बात करने वाले एक दूसरे के खून के प्यासे हो गये। गत, महीने भी दिल्ली के सीलमपुर इलाके में दंगे जैसे हालात पैदा हो गये थे उसके बाद देश के कई हिस्सों में हुई हिंसा में जान-माल की भारी छति हुई है।

सीएए विरोध के नाम पर मुसलमानों को सड़कों पर उतारकर कुछ सियासी पार्टियों ने अपना हित साधने का काम किया। विरोध के नाम पर ऐसा माहौल तैयार कर दिया गया कि प्रदर्शनकारियों के आगे शासनिक और प्रशासनिक व्यवस्था लाचार दिखी।  कुछ नेता अपने बयानों से अल्पसंख्यकों के इस विरोध प्रदर्शन को हिंसक बनाने का काम बहुत पहले ही कर चुके थे। विवादित बयानों की लंबी फेहरिश्त है और अगर जांच का दायरा बढ़ा तो गाज उन सभी पर गिर सकती है, जिन्होंने फिजा में जहर घोलने का काम किया है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने कपिल मिश्रा की वीडियो देखकर दिल्ली पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद एक बड़ी बहस छिड़ गई है कि एफआईआर दर्ज करने का आधार विवादित बयान ही है तो उन सभी नेताओं पर एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए जिन्होंनेे विवादित बयान दिये हैं। दिल्ली हिंसा के संदर्भ में एक याचिका दायर की गई जिसमें विवादित बयान देने वाले उन सभी नेताओं एवं मीडिया की सुर्खियां रहने वाली कई नामी हस्तियों के खिलाफ एआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।

याचिका दायर करने वाले वकील संजीव कुमार का कहना है कि सिर्फ कपिल मिश्रा ही क्यों ? ऐसे कई नाम है जो गुमनाम नहीं बल्कि मीडिया की सुर्खियां बने रहना चाहते हैं। जिनके विवादित बयानों ने देश की फिजा में जहर घोलने का काम किया है। आज अगर दिल्ली जल रही है तो इन सबको एक कड़ी से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

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